
फ्रांस भारत को राफेल लड़ाकू विमान के इंजन की तकनीक सौंपने को तैयार हो गया है। वह भारत को राफेल के इंजन की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी भी सौंपेगा। इसे भारत और फ्रांस के बीच बड़ी रक्षा डील से जोड़कर देखा जा रहा है। अभी तक फ्रांस ने इंजन की टेक्नोलॉजी देने से हमेशा ही इनकार किया था।
फ्रांसीसी कंपनी सैफरन भारत को राफेल लड़ाकू विमान के इंजन की तकनीक सौंपने के लिए तैयार हो गई है। राफेल में सैफरन के M88 इंजन का इस्तेमाल होता है। सैफरन ने पहले भारत को एक लोकल वर्शन और घरेलू एयरक्राफ्ट के लिए एक डेरिवेटिव इंजन का ऑफर किया था। हालांकि, अब यह कंपनी 100 प्रतिशत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने और भारत में एकदम नया पावरप्लांट शुरू करने में मदद के लिए मान गई है। सैफरन के इस कदम से भारतीय एविएशन इंडस्ट्रीज को बड़ी ताकत मिलने की संभावना है। भारत लंबे समय से फाइटर जेट इंजन के विकास के लिए काम कर रहा है।
राफेल इंजन की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी भी सौंपेगा फ्रांस – डिफेंस एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि राफेल के नए इंजन और उससे जुड़ी टेक्नोलॉजी की सारी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी पूरी तरह से भारत की होगी। हालांकि पूरी डिटेल्स अभी सामने नहीं आई हैं, लेकिन चर्चा AMCA पांचवीं जेनरेशन के फाइटर के इंजन के बारे में है, जिसके Su-57 से बेहतर परफॉर्म करने की उम्मीद है। यह सैफरन के पहले के 600 मिलियन डॉलर के प्रपोजल से कहीं ज्यादा महंगा होगा, लेकिन भारत ज्यादा ऑटोनॉमी और इंडस्ट्रियल कैपेबिलिटी के लिए पैसे देने को तैयार है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस इंजन पावरप्लांट की अनुमानित डेवलपमेंट टाइमलाइन लगभग 12 साल है।
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