
भारत सरकार के निर्देश पर आठ राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने अपने राज भवनों के नाम बदलकर लोक भवन कर दिए हैं। यह कदम औपनिवेशिक मानसिकता को दूर करने के लिए उठाया गया है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा के राज भवनों के नाम बदले गए हैं।
उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु समेत देश के 8 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश ने औपनिवेशिक काल की पहचान मिटाने के लिए अपने राज भवन का नाम बदलकर लोक भवन कर दिया है। यह बदलाव गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक निर्देश के बाद हुआ है, जिसका मकसद राज शब्द से जुड़े ब्रिटिश शासन के अवशेषों को हटाना है।
मंत्रालय के इस निर्देश के बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा ने अपने राज भवन का नाम बदलकर लोक भवन कर दिया है। वहीं लद्दाख के उपराज्यपाल के निवास-कार्यालय को अब लोक निवास कहा जाएगा। इसे पहले राज निवास कहा जाता था।
क्यों बदला गया राज भवन का नाम? – मंत्रालय ने पिछले साल राज्यपालों के सम्मेलन में हुई एक चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि राज भवन नाम औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है। इसलिए, राज्यपालों और उपराज्यपालों के कार्यालयों को अब लोक भवन’ और लोक निवास के नाम से जाना जाएगा।
राजपथ का भी बदला गया था नाम – राज भवन का नाम बदलकर लोक भवन करने का कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत की उसकी औपनिवेशिक जड़ों से मुक्त करने के प्रयासों का हिस्सा है। इससे पहले, राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया था और सरकारी कामकाज में इंडिया की जगह भारत शब्द का इस्तेमाल बढ़ रहा है। गणतंत्र दिवस पर होने वाले बीटिंग रिट्रीट समारोह में भी अब अबाइड विद मी जैसे अंग्रेजी धुनें नहीं बजाई जातीं।
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