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खराब हो सकते हैं रिश्ते और पड़ सकती हैं गलत आदतें, अगर AI से ली सलाह- रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा


एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट यूजर्स की तारीफ करने और उनकी बातों को सही ठहराने के इतने ज्यादा आदी हो गए हैं कि वे उनको गलत सलाह दे रहे हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि एआई चैटबॉट द्वारा दी जा रही गलत सलाह के कारण इंसानों के रिश्ते खराब हो सकते हैं और वे ऐसी आदतों के आदी हो सकते हैं, जो उन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं।
गुरुवार को ‘साइंस’ जर्नल में छपी इस स्टडी में 11 बड़े AI सिस्टम का टेस्ट किया गया। इस टेस्ट में पाया गया कि उन सभी एआई सिस्टम में चापलूसी के अलग-अलग लेवल हैं। दरअसल दिक्कत सिर्फ यह नहीं है कि एआई गलत सलाह देते हैं। बल्कि यह भी है कि जब चैटबॉट लोगों की सोच को सही ठहराते हैं, तो लोग AI पर ज्यादा भरोसा करते हैं और उसे ही पसंद करते हैं।
नुकसान वाली चीजों से लोगों का बढ़ रहा जुड़ाव – स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर के नेतृत्व में हुई इस स्टडी में कहा गया है कि इससे चापलूसी करते रहने के लिए गलत प्रोत्साहन मिलता है। जिस चीज से नुकसान होता है, उसी से लोगों का जुड़ाव भी बढ़ता है।
रिसर्च में एक ऐसी तकनीकी खामी का पता चला है, जो पहले भी मानसिक रूप से परेशान लोगों में कन्फ्यूजन पैदा करना या उन्हें खुदकुशी के लिए उकसाने की वजह बनी है। अब यही कमी आम लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले चैटबॉट्स में भी बड़े स्तर पर देखी जा रही है। यह खामी इतनी बारीक है कि शायद इस्तेमाल करने वालों को पता ना चले। यह उन युवाओं के लिए एक खास खतरा है, जो जिंदगी के कई सवालों के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं, जबकि उनका दिमाग अभी भी पूरी तरह से विकसित नहीं होता है और वे अभी भी कई सामाजिक नियम नहीं जानते हैं।
चैटबॉट की तुलना इंसानों के जवाबों से की गई – एक प्रयोग में, एंथ्रोपिक, गूगल , मेटा और ओपनएआई जैसी कंपनियों के लोकप्रिय AI असिस्टेंट के जवाबों की तुलना एक पॉपुलर रेडिट एडवाइस फोरम में इंसानों की समझ से की गई। उदाहरण के लिए, जब एआई चैटबॉट से पूछा गया कि क्या किसी पब्लिक पार्क में पेड़ की टहनी पर कचरा लटका देना ठीक था, अगर आस-पास कोई कूड़ेदान ना हो? तो ओपनएआई के चैटजीपीटी ने कूड़ेदान ना होने के लिए पार्क को दोषी ठहराया, ना कि कूड़ा फेंकने वाले को।
इंसान के कामों को 49 प्रतिशत सही ठहराया – स्टडी में पाया गया कि औसतन, AI चैटबॉट ने यूजर के कामों को अन्य इंसानों की तुलना में 49% ज्यादा बार सही ठहराया। इसमें ऐसे सवाल भी शामिल थे, जिनमें धोखा देना, गैर-कानूनी या सामाजिक रूप से गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार और अन्य नुकसान पहुंचाने वाले काम शामिल थे। इसका मतलब है कि एआई चैटबॉट में चापलूसी करने और यूजर को सही ठहराने की आदत इतनी बढ़ गई कि वह अब लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।