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UAE का पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा कदम, पाकिस्तानियों के लिए रोका ट्रांजिट वीजा, एक्सपर्ट ने दी चेतावनी


संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को बड़ा झटका देते हुए पाकिस्तानियों को दिए जाने वाले 46 और 96 घंटे के ट्रांजिट वीजा पर रोक लगा दी है। पाकिस्तानी पत्रकार और एक्सपर्ट कमर चीमा ने अपने व्लॉग में इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि अमीरात सरकार ने पाकिस्तानी पासपोर्ट होल्डर्स को कुछ ट्रांजिट वीजा- खास तौर पर 48 घंटे और 96 घंटे के परमिट देना बंद कर दिया है। यह रोक अगली सूचना तक जारी रहेगी। अधिकारियों ने आवेदकों इन वीजा श्रेणियों तहत आवेदन से बचने की सलाह दी है। इस रोक के बाद पाकिस्तानी प्रोफेशनल और UAE ट्रांजिट हब के जरिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा की योजना बना रहे लोगों के सामने चुनौतियां आ गई हैं।
पाकिस्तानियों के लिए मुश्किल हुआ UAE वीजा – UAE की सरकार ने अभी तक इसका कारण नहीं बताया है और यह भी नहीं बताया है कि यह रोक कब तक रहेगी। हालांकि, पाकिस्तानी विश्लेषक कमर चीमा का कहना है कि इस समय UAE का वीजा हासिल करना पाकिस्तान में सबसे मुश्किल काम हो गया है। इसके साथ ही चीमा ने यह भी बताया कि यूएई ने पाकिस्तान को दिया गया 2 अरब डॉलर का कर्ज 2 महीने में अदा करने को कहा है।
भारत के साथ मजबूत संबंध – चीमा ने आगे कहा कि एक तरफ यूएई पाकिस्तानियों के लिए ट्रांजिट वीजा बंद कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अबू धाबी भारत के साथ संबंध मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि ये एक चाल है। पाकिस्तान को इशारों में बताया जा रहा है कि हमारे यहां आप स्वागत नहीं है। पाकिस्तानी जनता को यह संदेश दिया जा रहा है कि आप अपना बंदोबस्त करो। ये भूल जाइए कि हम आपके दोस्त हैं।
चीमा ने संयुक्त अरब अमीरात की पाकिस्तान से दूरी की वजह का विश्लेषण किया और कहा कि इसके पीछे इस्लामाबाद की रियाद से बढ़ती नजदीकी प्रमुख है। पाकिस्तान ने बीते साल सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता किया था। इसके साथ ही पाकिस्तान ने सूडान और लीबिया में रक्षा डील की है, जिसने UAE को नाराज कर दिया है।
वीजा रोक का पाकिस्तान पर असर – ट्रांजिट वीजा मुख्य रूप से दुबई या अबू धाबी जैसे हब में छोटे स्टॉपओवर के लिए होते हैं। इस रोक से कई चुनौतियां आ सकती हैं। टाइट शेड्यूल वाले बिजनेस ट्रैवलर्स को अपने रूट बदलने पड़ सकते हैं। इससे अतिरिक्त खर्च और देरी का सामना कर पड़ सकता है। इसके साथ ही विदेशों में यूनिवर्सिटी के लिए लौटने वाले छात्रा या दूसरे देशों में रिश्तेदारों से मिलने जाने वाले परिवारों को अपने ट्रांजिट विकल्पों को फिर तलाश करना होगा।