
जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव हिरोकाजू मात्सुनो (Hirokazu Matsuno) ने शुक्रवार (26 मई) को कहा कि पिछले सप्ताह आयोजित ग्रुप ऑफ सेवन G7 शिखर सम्मेलन के बाद जापान रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाएगा. टोक्यो के शीर्ष सरकारी प्रवक्ता मात्सुनो ने गुरुवार को बेलारूस में सामरिक परमाणु हथियार तैनात करने के रूस के कदम की निंदा करते हुए कहा कि यह यूक्रेन के आक्रमण के आसपास की स्थितियों को और तेज करेगा.
मात्सुनो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि युद्ध के दौरान परमाणु बमबारी का सामना करने वाला जापान एकमात्र देश है. इस वजह से जापान कभी भी रूस के परमाणु खतरे को स्वीकार नहीं करेगा है. रूस इसके इस्तेमाल को छोड़ दें. अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस सहित G7 के नेताओं ने पिछले हफ्ते दुनिया के पहले परमाणु-बमबारी शहर हिरोशिमा में आयोजित वार्षिक शिखर सम्मेलन में रूस पर अतिरिक्त सैन्य सहायता और प्रतिबंधों के साथ यूक्रेन का समर्थन करने का संकल्प दिखाया.
रूसी अधिकारियों के संपत्ति होगी फ्रीज – जापान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (26 मई) के एक बयान जारी करते हुए कहा कि G7 देशों के साथ एक मिली जुली कार्रवाई में जापान रूस में सेना के अधिकारियों सहित 78 समूहों और 17 व्यक्तियों की संपत्ति को फ्रीज करेगा. इसके अलावा जापान 80 रूसी संस्थाओं जैसे सैन्य-संबद्ध अनुसंधान प्रयोगशालाओं को निर्यात पर प्रतिबंध लगाएगा.
जापानी व्यापार मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि जापान रूस को निर्माण और इंजीनियरिंग सेवाएं देने पर भी प्रतिबंध लगाएगा, हालांकि जापान इस तरह के बैन कब से लागू करेगा इसकी तारीख की घोषणा भी करेगा.
ब्रिटेन भी लगा चुका है बैन – जापान के हिरोशिमा में संपन्न हुए G7 देशों की बैठक में रूस को लेकर कड़े फैसले लिए गए. इनमें ब्रिटेन के तरफ से रूसी डायमंड पर बैन लगा दिया गया. इस पर ब्रिटेन के पीएम ऋषि सुनक ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य है रूस को दूसरे देशों को भेजे जाने पर मिलने वाले आर्थिक फायदे को नुकसान पहुंचाना है.
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