
पाकिस्तान की सीमा के अंदर घुसकर एक बार फिर ईरान ने हमला किया है। इस हमले के बाद एक बार फिर जैश अल अदल का नाम चर्चा में आ गया है। ईरान ने जनवरी में मिसाइल के जरिए पाकिस्तान में हमला किया था। लेकिन अब ईरान की सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए जैश अल अदल के कमांडर इस्माइल शाहबख्श और उसके कई साथियों को ढेर कर दिया है। पाकिस्तान की मीडिया में इससे जुड़ी कोई खबर नहीं आई है। अब सवाल उठता है कि आखिर यह जैश अल-अदल कौन है, जिनके आतंकियों पर एक बार फिर ईरान ने हमला किया है।
जैश अल-अदल एक सुन्नी संगठन है जो मुख्य रूप से पाकिस्तान की सीमा से लगे दक्षिण-पूर्वी ईरान में एक्टिव रहता है। जैश अल-अदल का मतलब न्याय की सेना होता है। 2012 में इसे बनाया गया था। 2013 में इसने एक हमले की जिम्मेदारी ली, जिसमें 14 ईरानी गार्ड मारे गए थे। इस हमले के बाद से जैश अल-अदल सुर्खियों में आ गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकी समूह ने तब कहा था कि यह हमला सीरिया में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के अपराधों और ईरान की ओर से सुन्नियों पर किए उत्पीड़न का जवाब है।
ईरान पर करता है हमला – जैश अल-अदल सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत की स्वतंत्रता और ईरान में बलूच लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने का दावा करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जैश अल-अदल की स्थापना जुंदाल्लाह के सदस्यों ने की थी। यह एक सुन्नी आतंकी समूह था, जिसके नेता अब्दोलमलेक रिगी को ईरान ने 2010 में पकड़ कर मार डाला था। जैश अल अदल ने बनने के बाद से ही सिस्तान और बलूचिस्तान के क्षेत्रों में ईरान के बॉर्डर गार्ड्स को निशाना बनाया। पिछले साल इस ग्रुप ने एक पुलिस स्टेशन पर हमले की जिम्मेदारी ली थी। जिसमें चार हमलावर समेत दो पुलिस अधिकारी मारे गए। वहीं 15 दिसंबर को जैश अलग-अदल ने एक अन्य पुलिस स्टेशन पर हमला किया, जिसमें 11 पुलिस अधिकारी मारे गए।
कैसे काम करता है जैश अल-अदल – जैश अल अदल का हमला ईरान में ज्यादातर उन जगहों पर होता है, जो पाकिस्तानी सीमा से लगे हैं। पाकिस्तान में इन्होंने अपने ठिकाने बनाए हुए हैं। हमला करने के बाद आतंकी वापस भाग जाते है, जो ईरान-पाकिस्तान के बीच खटास का बड़ा कारण है। जैश अल-अदल के लड़ाकों को बॉर्डर पोस्ट, और सैन्य काफिलों को निशाना बनाने के लिए जाना जाता है।
Home / News / जैश अल-अदल कौन है जिसके कारण ईरान ने फिर पाकिस्तान पर किया हमला, शिया-सुन्नी की जंग है बड़ी वजह
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