
भारत और ग्रीस के बीच का संबंध लगभग 2,500 साल पुराना है। लेकिन, हाल के दिनों में दोनों देशों के सामरिक रिश्ते में नई गर्माहट आने लगी है। खासकर रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों में एक नई जुगलबंदी होती दिख रही है, जिससे क्षेत्रीय जियोपॉलिटिक्स में नए समीकरण बनने की संभावना पैदा हुई है। बड़ी बात ये है कि इस जुगलबंदी में इजरायल का भी एक एंगल है, जो इन तीनों देशों को आपस में ‘त्रिशक्ति’ बनकर काम करने का अवसर दे रहे हैं।
भारत और ग्रीस के रिश्ते में नई गर्माहट – ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को तुर्की के रूप में एक नए दुश्मन का सामना करना पड़ा। इससे पहले ऐसी उम्मीद नहीं थी कि तुर्की इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान के नापाक करतूतों को हवा देने का काम करेगा। यह वही तुर्की है, जो ग्रीस का पारंपरिक दुश्मन रहा है। इस नापाक गठजोड़ के दौरान भारत और ग्रीस के बीच रिश्तों में नए सिरे से गरमाहट की शुरुआत तुर्की और पाकिस्तान दोनों के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है।
भारत-ग्रीस में सैन्य-रक्षा संबंधों में भी तेजी – न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने ग्रीक सिटी टाइम्स के हवाले से एक रिपोर्ट दी है कि ‘ग्रीस और भारत महत्वपूर्ण रूप से अपने रणनीतिक बातचीत में मजबूती ला रहे हैं। दोनों देशों के सैन्य संबंध एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं।’ इसके अनुसार दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध न सिर्फ द्विपक्षीय हितों के लिए जरूरी है, बल्कि भूमध्य सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन और स्थिरता के लिए भी अहम हैं।
पीएम मोदी से मिले ग्रीस के पीएम मित्सोटाकिस – हाल ही में दिल्ली में हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट (AI Summit) में शामिल होने के लिए ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यरिआकोस मित्सोटाकिस भारत आए थे और शिखर सम्मेलन के बीच ही उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई थी। इस बैठक के बाद पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, ‘हाल के वर्षों में भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।’
भारत-ग्रीस-इजरायल की ‘त्रिशक्ति’ महत्वपूर्ण – रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जो माहौल बन रहा है, उसे देखते हुए दोनों देश सैन्य स्तर पर रणनीतिक साझेदारी को काफी अहम मान रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि भारत और ग्रीस में जिस तरह से रक्षा तालमेल बढ़ रहा है, उसे इजरायल के साथ त्रिपक्षीय सहयोग के तौर पर देखा जाना चाहिए। ग्रीक टाइम्स का कहना है कि भूमध्य सागर में ग्रीस का अनुभव और हिंद महासागर में भारत का दबदबा दोनों को साथ मिलकर काम करने का कारण देते हैं।
तुर्की-पाकिस्तान के नापाक गठजोड़ का मिला तोड़ – इस रिपोर्ट में भी पाकिस्तान और तुर्की की नई रणनीतिक साठगांठ का जिक्र किया गया है, जिसे ग्रीस भी अपने लिए नई चुनौती की तरह देख रहा है। ऊपर से सऊदी अरब के भी उनके पीछे होने से एक तरह से ‘इस्लामिक नाटो’ के विचार की आशंका भी इसमें जताई गई है। ऐसे समय में पीएम मोदी की इजरायल यात्रा की अहमियत इस बदले हुए वैश्विक परिदृश्य में और बढ़ गई है।
भारत-ग्रीस के द्विपक्षीय सहयोग का महत्त्व – गेटवे ऑफ यूरोप: पूर्व भूमध्य सागर में ग्रीस की मौजूदगी भारत के लिए यूरोप का द्वार खोलता है।
IMEC: प्रस्तावित इंडिया-मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडर के लिए भी महत्वपूर्ण
तुर्की-पाकिस्तान का काउंटर बैलेंस: भारत के लिए दुश्मनों के खिलाफ साझा हित वाला एक मजबूत सहयोगी
हिंद-प्रशांत और भूमध्य सागर: दोनों की दोस्ती का मजबूत आधार
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