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‘आप ब्रिक्स के बॉस हो’…पीएम मोदी से ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, अमेरिका-इजरायल के हमले रुकवाएं, क्या ये पाकिस्तान का प्रोपेगंडा?


भारत पर ईरान की ओर से कूटनीतिक दबाव पड़ रहा है। वजह यह है कि भारत इस BRICS का अध्यक्ष है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने नई दिल्ली से कहा है कि भारत को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान की निंदा करनी चाहिए। इस वक्त दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मज स्ट्रेट से सप्लाई बाधित हो चुकी है। हालांकि, ईरान से बातचीत के बाद भारत के जहाज सीमित स्तर पर भारतीय नौसेना की निगरानी में भारत आ पा रहे हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत में कहा है कि आप तो ब्रिक्स के बॉस हो, आप अमेरिका-इजरायल युद्ध रुकवाएं। इस दावे में कितनी सच्चाई है यह भी जानेंगे।
युद्ध होने के दौरान ब्रिक्स देशों में नहीं बन पाई आम राय – ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा संघर्ष के दौरान ईरान की ओर से यह अपील तब आई है, जब ब्रिक्स इस मसले पर किसी एकजुटता वाली स्थिति बनाने में फेल रहा है। युद्ध के चार हफ्ते होने के बाद भी इस मसले पर ब्रिक्स के सदस्य देशों में आम राय नहीं बन पाई है।
मनी कंट्रोल की एक स्टोरी में ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि भारत ने अब तक समूह के माध्यम से हस्तक्षेप करने की मांगों का विरोध किया है।
नई दिल्ली का मानना है कि वह ब्रिक्स का अध्यक्ष होने की वजह से किसी का पक्ष नहीं ले सकता है। हालांकि, भारत अपने सदस्यों के बीच किसी प्रस्ताव पर पहुंचने के लिए बातचीत को बढ़ावा दे सकता है। ब्रिक्स देशों के बीच अमेरिका-ईरान युद्ध को लेकर अभी असहमति है।
ईरान चाहता है ब्रिक्स देश करें अमेरिका-इजरायल की निंदा – रिपोर्ट के अनुसार, ईरान 2024 से ब्रिक्स का सदस्य है और वह बेहद मजबूती से ब्रिक्स देशों को अमेरिका-इजरायल के हमलों की निंदा करने के प्रस्ताव को बढ़ा रहा है। मगर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर रहे हैं। वहीं, चीन और रूस मौन रहकर ईरान का समर्थन कर रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया पोस्ट पर पीएम मोदी को ब्रिक्स का बॉस बताया जा रहा है।
तीन प्रस्तावों में दो खारिज, एक पर हो रही चर्चा – रिपोर्टों के अनुसार, कहा जा रहा है कि ऐसे तीन प्रस्ताव ब्रिक्स देशों के बीच घूम रहे हैं। अमेरिका की निंदा करने वाले दो प्रस्ताव तो ब्रिक्स के सदस्य देशों की ओर से खारिज हो चुके हैं। मगर, तीसरा प्रस्ताव ज्यादा न्यूट्रल है, जिस पर सदस्यों के बीच चर्चा चल रही है। कुछ सदस्य देश ब्रिक्स को चेतावनी दी है कि अगर यह मौजूदा बड़े जियोपॉलिटिकल संकट से निपटने में कामयाब रहता है तो इसकी प्रासंगिकता खत्म हो सकती है।
भारत रणनीतिक तरीके से हर पक्ष में बना रहा संतुलन – रिपोर्टों के अनुसार, भारत की स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है। भारत के अमेरिका और इजरायल से करीबी रणनीतिक रिश्ते हैं। वहीं, भारत के ईरान से भी लंबे समय से बेहतर संबंध हैं। युद्ध शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल के दौरे पर गए थे। भारत के यूएई और खाड़ी के बाकी देशों से भी अच्छे संबंध हैं। खाड़ी में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते हैं।
मोदी ने पेजेश्कियन से बातचीत के दौरान क्रिटिकल ढांचों पर हमलों की निंदा की। ये इनडायरेक्ट ही सही लेकिन उन्होंने पहली बार ईरान वॉर में अमेरिका और इजरायल के एक्शन की आलोचना की। ये दिखाता है कि अमेरिकी-इजरायली एक्शन किस कदर भारत के आर्थिक और ऊर्जा हितों पर गंभीर खतरा डाल रहे हैं।
ईरान के राष्ट्रपति ने कहा था-ब्रिक्स से युद्ध रुकवाने की अपील की थी – बीते 21 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। भारत में ईरान के दूतावास के ट्विटर हैंडल से भी पीएम मोदी और पेजेश्कियन के बीच बातचीत का ब्योरा दिया है। इसमें भी ब्रिक्स का भी जिक्र किया गया है।
इसमें भारत के ब्रिक्स की अध्यक्षता का जिक्र करते हुए कहा गया है कि पेजेश्कियन ने कहा है कि ईरान के खिलाफ युद्ध को रुकवाने में ब्रिक्स स्वतंत्र भूमिका निभा सकता है। साथ में यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में बड़ी भूमिका निभा सकता है।