
कोरोना महामारी, जिसने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। सामान्य जिंदगी के बीच लोगों के आम जीवन का हिस्सा मास्क और सैनेटाइजर भी बन गया। इन ऐहतियातों को अपनाते हुए अब हर शख्स जल्द से जल्द वैक्सीन का इंतजार कर रहा है। इस बीच मॉडर्ना की ओर से भी गुड न्यूज दी गई है। गुड न्यूज क्या है आइए देखते हैं तस्वीरों में।
कोरोना का अंत करीब… Moderna का दावा- महामारी से निपटने में 94.5% कारगर हमारी वैक्सीन
कोरोना वायरस (Corona Vaccine Latest News India) की वजह से दुनियाभर में मौतों की संख्या में इजाफा होता जा रहा है। लोगों को अब इस महामारी पर लगाम लगाने वाले एक सफल टीके का बेसब्री से इंतजार है। हर शख्स अब इस बीमारी की परछाईं से आजाद होकर खुली हवा में सांस लेना चाहता है। इस बीच एक और ‘गुड न्यूज’ आई है, जिसको सुनकर आपको राहत मिलेगी। दरअसल, बायोटेक कंपनी मॉडर्ना की ओर कहा गया है कि कोरोना के खिलाफ तैयार की जा रही दवा बीमारी को रोकने में 94.5 फीसदी तक कारगर है। यह दावा क्लीनिकल ट्रायल के विश्लेषण के आधार पर किया जा रहा है।
दिसंबर के अंत तक अमेरिका में 2 वैक्सीन : इससे पहले फाइजर की वैक्सीन ने भी इस महामारी के खिलाफ 90 फीसदी से ज्यादा प्रभाव दिखाया है। माना जा रहा है कि अमेरिका दिसंबर तक दो वैक्सीन को आपातकालीन मंजूरी दे सकता है। इसके साथ ही इस वर्ष के अंत (2020 के अंत) तक वैक्सीन के 6 करोड़ डोज उपलब्ध हो जाएंगे।
बड़े पैमाने पर किया गया है मॉडर्ना का परीक्षण : फाइजर और बायोटेक दोनों की वैक्सीन का गहनता से बड़े पैमाने पर परीक्षण किया गया है। मॉडर्ना की स्टडी में 30 हजार वॉलनटिअर्स ने हिस्सा लिया था। इनमें से आधे लोगों को 28 दिनों में दो डोज दिए गए जबकि आधे लोगों को उसी शेड्यूल में प्लेसिबो (नकली वैक्सीन) के दो डोज दिए गए।
भारत में कोरोना वैक्सीन कब तक? : उधर, दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन निर्माता फर्म सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा है कि भारत को दिसंबर तक ब्रिटेन की दवा कंपनी ऐस्ट्राजेनेका की ओर से विकसित की जा रही कोरोना वैक्सीन के 10 करोड़ डोज मिल सकते हैं।
भारत में भी मिल सकती है इमर्जेंसी मंजूरी : सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के सीईओ अदार पूनावाला कहते हैं कि यदि आखिरी चरण के ट्रायल डेटा में ऐस्ट्राजेनेका के टीकाकरण के बाद वॉलनटिअर्स को वायरस के खिलाफ सुरक्षित पाया गया तो दिसंबर तक नई दिल्ली से टीकाकरण के लिए आपातकालीन मंजूरी मिल सकती है। बता दें कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने वैक्सीन के कम से कम 100 करोड़ डोज बनाने के लिए समझौता किया है।
’40 मिलियन डोज तैयार हो चुकी हैं’ :SII के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि पूरी तरह से अनुमति मिलने के बाद अगले वर्ष से भारत और डब्ल्यूएचओ की समर्थित संस्था कोवैक्स (जो गरीब देशों के लिए वैक्सीन का प्रबंध करती है) को 50-50 के हिसाब से वैक्सीन उपलब्ध कराई जाएगी। सीरम ने पांच डिवेलपर्स के साथ अनुबंध किया था। इसके बाद से अबतक यानी कुल दो महीने में ऐस्ट्राजेनेका की 40 मिलियन डोज तैयार हो चुकी हैं।
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