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पर्स्ड लिप ब्रीदिंग से फेफड़े होते हैं साफ, शांत जगह बैठकर 5-10 मिनट करो 5 एक्सरसाइज


शरीर को हेल्दी रखने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है और पर्याप्त ऑक्सीजन के लिए मजबूत फेफड़ों की आवश्यकता होती है। लेकिन प्रदूषण और सुस्त जीवनशैली से लंग्स फंक्शन में गिरावट आने लगती है, इससे बचने के लिए 5 रेस्पिरेटरी एक्सरसाइज करना महत्वपूर्ण है। इन रेस्पिरेटरी एक्सरसाइज को करने का एक सही तरीका और कुछ सावधानियां भी होती हैं।
रेस्पिरेटरी सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। डॉक्टर होने के नाते मैं लोगों को पर्स्ड लिप ब्रीदिंग जैसी 5 एक्सरसाइज करने की सलाह देती हूं। ये एक्सरसाइज आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, पॉल्यूशन और सुस्त जीवनशैली के दौरान फेफड़ों की मसल्स को रिलैक्स व मजबूत रखती हैं। जिसकी वजह से लंग्स मसल्स पूरी तरह खुलकर सांस लेने का काम करती हैं। इन एक्सरसाइज को करने में महज 5 से 10 मिनट का वक्त लगता है।
रेस्पिरेटरी एक्सरसाइज करना क्यों जरूरी है? – रेस्पिरेटरी एक्सरसाइज से डायाफ्राम और इंटरकोस्टल मसल्स को मजबूती मिलती है। यह दोनों चीज आसानी से ब्रीदिंग करने के लिए जरूरी होती हैं। शैलो ब्रीदिंग और कम फिजिकल एक्टिविटी करने से धीरे-धीरे फेफड़ों के अंदर बासी हवा ठहरने लगती है। इसकी वजह से फेफड़ों की कैपासिटी कम हो जाती है और एक्सेसरी मसल्स पर जोर पड़ने लगता है। इसके कारण ब्रीदिंग पैटर्न बिगड़ जाता है और शरीर में ऑक्सीजन लेवल भी कम हो जाता है। धीरे-धीरे थकान, स्टेमिना की कमी और फिजीकल रिजर्व में कमी होने लगती है।
रेगुलर ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से फेफड़ों में फंसी हवा और म्यूकस निकलने लगता है, एयरवे की इंफ्लामेशन कम होती है और ऑक्सीजन एक्सचेंज सुधरता है। ये एक्सरसाइज अस्थमा, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) या पोस्ट इंफेक्शन रिकवरी के मरीजों के लिए काफी प्रभावशाली साबित होती हैं। ब्रीदिंग एक्सरसाइज से नर्वस सिस्टम शांत होता है, तनाव कम होता है, स्लीप क्वालिटी सुधरती है और रिलैक्सेशन बढ़ता है।
जैसे एरोबिक एक्सरसाइज दिल को मजबूत बनाती हैं, वैसे ही ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों की एफिशिएंसी बढ़ाती है, रेस्पिरेटरी और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के बीच बढ़िया कोर्डिनेशन बनाती है। शरीर में ऑक्सीजन डिलीवरी सुधरने से एनर्जी लेवल भी बढ़ता है, इम्यूनिटी को सपोर्ट मिलता है और इंफेक्शन का खतरा कम होता है।
5 से 10 मिनट करें ये 5 एक्सरसाइज – इन एक्सरसाइज को शांत माहौल में बैठकर 5 से 10 मिनट तक प्रैक्टिस करें। रोजाना अभ्यास करने से इन्हें करना आसान हो जाएगा और सांस फूलने की समस्या खत्म हो जाएगी।
1. डायाफ्राग्मेटिक ब्रीदिंग – जमीन पर आराम से सीधा लेट या बैठ जाएं।
एक हाथ को पेट पर रखें और दूसरा छाती पर रखें।
2 सेकंड तक नाक से धीरे-धीरे सांस लें।
सांस लेते हुए छाती को स्थिर रखें और पेट को फूलने दें।
अब होंठ सिकोड़कर यानी पर्स्ड लिप के साथ 2 सेकंड तक मुंह से सांस छोडें।
इस साइकिल को 5 से 10 बार करें, जो फेफड़ों को पूरी तरह खुलने और ऑक्सीजन इनटेक बढ़ाने में मदद करेगा।
2. पर्स्ड लिप ब्रीदिंग – धीरे-धीरे 2 की गिनती तक नाक से सांस लें।
अब होंठों को सिकोड़ें जैसे सीटी बजाने वाले हों और फिर 4 की गिनती तक धीरे-धीरे मुंह से सांस छोड़ें।
ऐसा कुछ देर करें, जिससे आपका ब्रीदिंग पर कंट्रोल बनने लगेगा और सांस फूलना कम हो जाएगा।
3. बॉक्स (स्क्वॉयर) ब्रीदिंग – नाक से 4 की गिनती तक सांस लें।
अब 4 की गिनती तक सांस होल्ड करें।
फिर 4 की गिनती तक सांस छोड़ें।
फिर से 4 की गिनती तक होल्ड करें।
ऐसा 5 से 10 बार करें, जिससे आपका ब्रीदिंग पैटर्न रेगुलेट होगा, फोकस सुधरेगा और तनाव कम होगा।
4. डीप कफिंग टेक्निक – पीठ सीधी करके जमीन पर बैठकर नाक से गहरी सांस लें।
2-3 सेकंड सांस होल्ड करें और फिर डायाफ्राम से जोर लगाकर खांसें।
खांसने के दौरान ‘हा’ की आवाज निकालें।
इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं, जिससे फेफड़ों में फंसा बलगम बाहर निकलेगा और इंफेक्शन से बचाव होगा।
5. अल्टरनेट नोज्ट्रिल ब्रीदिंग – पीठ सीधी करके जमीन पर बैठ जाएं।
अब हाथ के अंगूठे से एक नथने को बंद करें और दूसरे से गहरी सांस लें।
फिर उंगली से दूसरा नथना बंद करें और पहले नथने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
ऐसा 5 मिनट तक दोहराते रहे, जिससे एयरफ्लो का बैलेंस बनेगा, लंग फंक्शन सुधरेगा और मानसिक शांति मिलेगी।
कुछ सावधानियां भी बरतें – किसी भी ब्रीदिंग एक्सरसाइज को रुटीन में लाने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। क्रोनिक लंग कंडीशन, हार्ट डिजीज या सर्जरी से रिकवरी कर रहे लोग जरूर इस सलाह को फॉलो करें। इन एक्सरसाइज को करने पर हल्की सांस फूलना नॉर्मल है, लेकिन यह बहुत ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर सांस लेने में दिक्कत हो या सिर घूमने लगे तो एक्सरसाइज तुरंत बंद कर दें।
लंग फंक्शन को सही रखने के लिए हाइड्रेशन का ध्यान रखें और प्रदूषण के दौरान खुली हवा में एक्सरसाइज करने से बचें। बहुत ज्यादा ठंड, गर्मी या उमस में भी एक्सरसाइज ना करें। ऑक्सीजन थेरेपी लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह के बिना ऑक्सीजन लेवल में बदलाव ना करें।