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चीन के मुस्लिमों पर बढ़े अत्याचार, उइगरों और अल्पसंख्यकों को कठिन श्रम के लिए कर रहा मजबूर


चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों व अन्य अल्पसंख्यकों पर शी जिनपिंग सरकार के अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं। नई रिसर्च की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन सरकार जबरन उइगरों से कठोर श्रम करवा रही है। बीबीसी के नए शोध के अनुसार शिनजियांग के पश्चिमी क्षेत्र के विशाल कॉटन के खेतों में हजारों उइगरों और अन्य अल्पसंख्यकों को कठिन श्रम के लिए मजबूर किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार चीन ने लाखों लोगों को शिविरों में जबरन हिरासत में रखा हुआ है। इसके अलावा उइगरों से जबरदस्ती कपड़ा कारखानों में काम करवाया जा रहा है। हालांकि चीन सरकार ने इन दावों को नकारते हुए कहा है कि वह इन शिविरों में उइगरों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दे रहा हैं। इसके अलावा उसका दावा है कि ये कारखाने गरीबी उन्मूलन योजना का हिस्सा हैं और यह लोग स्वैच्छिक रूप से इससे जुड़ते हैं।
ऑनलाइन दस्तावेजों के आधार पर चीन दुनिया में कपास के पांचवें हिस्से की आपूर्ति करता है और वैश्विक फैशन उद्योग में व्यापक रूप से कपास का भागीदार है
गौरतलब है कि इससे पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिसर्च रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि उत्तर पश्चिमी चीन के शिनजियांग में उइगर मुसलमानों को कड़ी पाबंदियों में रखा गया है जिस कारण ये लोग चीनी प्रशासन से काफी खफा हैं। इन लोगों के मुस्लिम अरबी में अपनी कुरान पढ़ने तक रोक है। इस समुदाय का आऱोप है कि चीन सरकार उन लोगों को इनके धर्म से दूर रख कर उनका धार्मिक संहार कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार यहां अक्सर लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। चीन के राष्ट्रीय चिकित्सा उत्पाद प्रशासन के अनुसार शिनजियांग में केवल चार कंपनियों ने महामारी से पहले चिकित्सा-ग्रेड सुरक्षात्मक उपकरण (पीपीई किट) का उत्पादन किया था। 30 जून तक यह संख्या 51 थी। श्रम हस्तांतरण कार्यक्रम के तहत सरकार उइगर और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों को कारखाने और सेवा नौकरियों में भेजता है। कई बार इन लोगों को जबरन भेजा जाता है जबकि वो वहां पर जाना ही नहीं चाहते हैं। चूंकि चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन है इस वजह से उनकी कोई सुनवाई नहीं होती है।