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कानूनी लड़ाई हारे डोनाल्ड ट्रंप अब ‘स्लो मोशन तख्तापलट’ में जुटे, जो बाइडेन से जीत छीनने की नई रणनीति


मिशिगन के रिपब्लिकन सांसदों की शुक्रवार को वाइट हाउस में पेशी हुई। दरअसल, चुनाव में हार चुके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब तक कुर्सी बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। अब मिशिगन के सांसदों से कहा जा रहा है कि जो बाइडेन-कमला हैरिस को मिला बहुमत स्वीकार करने की जगह मिशिगन के 16 वोट ट्रंप को दिए जाएं। रिपब्लिकन खेमा अभी भी यह दावा कर रहा है कि चुनाव में धांधली की गई जबकि कोर्ट में यह साबित नहीं किया जा सका है।
ऐसा ही 20 इलेक्टोरल वोट वाले पेन्सिल्वेनिया और 10 इलेक्टोरल वोट वाले विस्कॉन्सिन में किया जा रहा है। यहां बाइडेन की जीत हो चुकी है लेकिन इलेक्टोरल वोट्स को अपने पक्ष में करने की उम्मीद रिपब्लिकन पार्टी ने खोई नहीं है। राष्ट्रपति चुनाव में बाइडेन को 306-232 के अंतर से आगे मान लिया गया है।
‘लोकतंत्र विरोध की परिभाषा’ : एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ट्रंप 46 इलेक्टोरल वोटों का उलटफेर कर लेते हैं तो उनके लिए वाइट हाउस में बने रहने की संभावना भी रहेगी। कई राजनीतिक विश्लेषक ट्रंप की इस कोशिश को तख्तापलट मानते हैं। कांग्रेस के पूर्व काउंसल रहे डैनियल गोल्डमैन ने चेतावनी दी है, ‘कानूनी चुनौतियां खत्म हो चुकी हैं। ट्रंप को एहसास है कि अदालतों से फायदा नहीं होगा, इसलिए वह चुने हुए अधिकारियों को लोगों के फैसले को पलटने के लिए मनाने में जुटे हैं।’ डैनियल का कहना है कि यह राजनीतिक तख्तापलट ही लोकतंत्र-विरोधी होने की परिभाषा है।
एक तरफ अमेरिकी मीडिया जो बाइडेन को अमेरिका का अगला राष्‍ट्रपति घोषित कर रहा था, दूसरी तरफ ट्रंप गोल्‍फ खेलने में खुद को बिजी रखे हुए थे।
ट्रंप का नाम, अमेरिका के उन 11 राष्ट्रपतियों की सूची में दर्ज हो गया है जिन्होंने इस पद पर बने रहने के लिए लगातार दोबारा जीत हासिल करने की नाकाम कोशिशें की थीं । रिचर्ड निक्सन के इस्तीफे के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बने गेराल्ड फोर्ड 1976 में दोबारा राष्ट्रपति बने रहने के अपने प्रयासों में सफल नहीं हुए थे। ट्रंप से पहले दूसरे चुनाव में पराजित होने वाले अंतिम राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश (1992 में) थे।
अमेरिकी राष्‍ट्रपति पर जनवरी में नए प्रशासन के कार्यकाल संभालने पर सत्ता का आसानी से हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए दबाव बढ़ रहा है। ‘जनरल सर्विसेज एडमिनिस्ट्रेटन’ (GSA) पर बाइडेन को निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप से औपचारिक रूप से मान्यता देने की जिम्मेदारी है। इसके बाद सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया आरंभ होगी। एजेंसी की प्रशासक एमिली मर्फी ने अभी तक यह प्रक्रिया आरंभ नहीं की है और न ही यह बताया है कि वह कब ऐसा करेंगी। एमिली की नियुक्ति ट्रंप ने की थी।

व्हाइट हाउस में पिछले तीन कार्यकालों में शामिल रहे एक द्विदलीय समूह ने भी ट्रंप से ‘‘चुनाव के बाद सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तत्काल’’ आगे बढ़ाने की अपील की है। ‘सेंटर फॉर प्रेजिडेंशियल ट्रांजिशन’ सलाहकार बोर्ड ने एक बयान में कहा कि यह कड़ी मेहनत से लड़ा गया चुनाव था, लेकिन इतिहास ऐसे राष्ट्रपतियों के उदाहरण से भरा पड़ा है, जिन्होंने चुनाव परिणाम के बाद अपने उत्तराधिकारियों की गरिमा के साथ मदद की। इस बयान पर पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के कार्यकाल में व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ रहे जोश बोल्टन एवं स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री रहे माइकल लिविट, पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के कार्यकाल में व्हाइट हाउस में चीफ ऑफ स्टाफ रहे थॉमस ‘मैक’ मैक्लार्टी और पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में मंत्री रहे पेन्नी प्रित्जकर ने हस्ताक्षर किए।
एक ओर ट्रंप जहां गोल्‍फ खेलकर वक्‍त काट रहे हैं, जो बाइडेन ने सरकार बनाने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उन्‍होंने कोविड-19 से निपटने के लिए टीम तैयार करनी शुरू कर दी है, लेकिन GSA की औपचारिक घोषणा से पहले यह प्रक्रिया पूरी तरह शुरू नहीं हो सकती।

जोसेफ आर बाइडेन ने ट्रंप को हराकर अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति का पद हासिल किया है। वह 20 जनवरी, 2021 को शपथ लेंगे। लगभग 160 साल पहले इसी समय के आसपास अब्राहम लिंकन अमेरिकी राष्ट्रपति चुने गए थे।

आक्रामक होते जा रहे तेवर : यही नहीं, ट्रंप से जुड़े लोग अपने फॉलोअर्स से ‘देश को फिर से हासिल करने’ की अपील कर रहे हैं। इसे उग्रवाद को उकसाने की कोशिश माना जा रहा है। ट्रंप किस हद तक जीतने हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके गुस्से का शिकार रिपब्लिकन नेता भी हो रहे हैं। दरअसल, रिपब्लिकन खेमे में ऐसे भी लोग हैं जो ट्रंप की इन कोशिशों का विरोध कर रहे हैं। ट्रंप ने धमकी दी है कि उन्हें पार्टी के आंतरिक चुनावों में हरा दिया जाएगा। वह अपने वफादार नेताओं से लेकर उन मीडिया संगठनों पर भी आग उगल रहे हैं जो अब उनके दावों पर शक जता रहे हैं।

अमेरिका के सभी पूर्व-राष्ट्रपतियों की जिंदगी हमेशा खतरे में रहती है। इसलिए उन्हें ताउम्र सुरक्षा मिलती है और सिक्रेट सर्विस एजेंट हमेशा उनके साथ होते हैं। अमेरिका के कोई भी पूर्व राष्ट्रपति सुनसान सड़कों पर तो ड्राइव कर सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर ड्राइविंग नहीं कर सकते। 1963 में जॉन एफ केनेडी (John F. Kennedy) की हत्या के बाद 1963 से 1969 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे लिंडन बी. जॉनसन (Lyndon B. Johnson) वो आखिरी राष्ट्रपति थे जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद भी खुले में ड्राइविंग की थी।

अमेरिका के राष्ट्रपति पद पर रहते हुए तो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर तरोताजा जानकारियां मिलती ही रहती हैं, रिटायरमेंट के बाद भी यह सिलसिला जारी रहता है। पूर्व राष्ट्रपति से राष्ट्रीय सुरक्षा पर आजीवन सलाह ली जाती है। याद रहे कि 2018 में ऐसी खबर आई थी कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारियों से महरूम करने की धमकी दी। हालांकि, बाद में ट्रंप ने इस खबर को गलत बताया था।

1955 प्रेजिडेंशियल लाइब्रेरीज ऐक्ट के तहत हरेक पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर एक लाइब्रेरी होगी। इस लाइब्रेरी में संबंधित व्यक्ति के राष्ट्रपति के तौर पर लिए गए फैसलों और उनके कार्यकाल की प्रमुख घटनाओं की जानकारी उपलब्ध होती है। यह फैसला तब हुआ जब राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने अपने कार्यकाल में हुए विश्व प्रसिद्ध वॉटरगेट कांड से संबंधित जानकारियां छिपाने की कोशिश कीं।

पूर्व राष्ट्रपतियों के नाम आने वाले पैकेज, पत्र या अन्य वस्तुओं की जांच सिक्रेट सर्विस एजेंट करते हैं। अमेरिका की पोस्टल सर्विस भी पूर्व राष्ट्रपतियों के नाम आए पैकेज की गहरी छानबीन करते हैं। उनके फोन, चैट, मेसेज पर भी सुरक्षा एजेंसियों की नजर रहती है। इतना ही नहीं, पूर्व राष्ट्रपति कभी अकेले नहीं रह सकते। उनके साथ हमेशा सिक्रेट सर्विस के सदस्य साये की तरह रहते हैं।
देश की व्यवस्था पर चेतावनी
ट्रंप के वकील अदालतों में करीब 30 केस हार चुके हैं और अभी भी वे ऐसे दावे किए जा रहे हैं जिन्हें वह कोर्ट में साबित नहीं कर पाते या पेश ही नहीं करते। एक ओर जहां इसे लेकर मजाक किए जा रहे हैं, विशेषज्ञ चिंतित भी हैं और देश की चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक व्यवस्था की हालत को लेकर चेतावनी देते हैं। मिशिगन में ट्रंप ने बाइडेन की जीत के बाद वोटों को सर्टिफाई नहीं करने के लिए और पार्टी के सांसदों से उन्हें जिताने के लिए भी कहा है।

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