
अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारत, चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के साथ अपने वर्तमान मंगल मिशन का डेटा साझा किया है, ताकि लाल ग्रह पर किसी टक्कर के जोखिम से बचा जा सके क्योंकि इन देशों के अंतरिक्ष यान भी मंगल का चककर लगा रहे हैं। यह जानकारी बुधवार को मीडिया में आई एक रिपोर्ट में दी गई।
हांगकांग आधारित ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ ने नासा के हवाले से अपनी खबर में लिखा है भारत, चीन, यूएई और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यान भी लाल ग्रह का चक्कर लगा रहे हैं, इसलिए यानों के बीच किसी टक्कर के जोखिम को कम करने के लिए डेटा का आदान-प्रदान किया गया।
नासा ने एक बयान में कहा, ‘हमारे संबंधित अभियानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नासा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), यूएई, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और चाइना नेशनल स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन के साथ समन्वय कर रहा है क्योंकि इन सभी के यान मंगल की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं।’
एक और रंगीन तस्वीर में मंगल का उत्तरी ध्रुव दिख रहा है। इनमें बादलों की तरह बर्फ की चोटियां दिख रही हैं जो रेत के टीले पर जमा हैं। तियानवेन-1 का रोवर मई या जून में सतह पर पहुंचेगा। अभी तक इसे कई नाम नहीं दिया गया है लेकिन यह सतह पर टचडाउन के बाद 90 दिन तक ऑपरेट करेगा। Tianwen-1 के मिशन में मंगल की बनावट और भूगोलिक संरचना को स्टडी करना शामिल है। इसके अलावा इसका चुंबकीय क्षेत्र, आइओनोस्फीयर और वायुमंडल भी स्टडी किया जाएगा।
तियानवेन के अलावा संयुक्त अरब अमीरात का ऑर्बिटर होप भी मंगल का चक्कर काट रहा है। इसका लक्ष्य है मंगल का पहला ग्लोबल वेदर मैप भी तैयार करना। ये मिशन इसलिए खास है क्योंकि इससे पहले के रोवर मंगल के चक्कर ऐसे काटते थे कि वह दिन के सीमित वक्त में ही उसके हर हिस्से को मॉनिटर कर पाते थे। इससे अलग होप का ऑर्बिट अंडाकार है जिसे पूरा करने में इस रोवर को 55 घंटे लगेंगे। इसकी वजह से यह मंगल के हिस्सों पर दिन और रात में ज्यादा समय के लिए नजर रख सकेगा। मंगल के एक साल में यह हर हिस्से पर पूरे दिन नजर रखेगा।
वहीं, अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA का रोवर Perseverance मंगल की सतह पर उतर चुका है और इसने अपना काम भी शुरू कर दिया है। लैंड होने के बाद रोवर ने अपने उपकरणों की जांच की। इसके अलावा इसके रोबॉटिक आर्म को भी हिला-डुलाकर देखा गया। जल्द ही यह सतह पर खोज का काम शुरू करेगा। इसके साथ गए हेलिकॉप्टर Ingenuity ने भी पहला संदेश धरती पर भेज दिया है। यह रोवर Jezero Crater पर जीवन के निशान ढूंढेगा जिसे मंगल पर प्राचीन जीवन का स्टोर कहा जाता है। माना जाता है कि यहां चट्टानों में जीवन के निशान कैद मिल सकते हैं।
भारत का मंगलयान 2014 से मंगल की कक्षा में लगातार चक्कर लगा रहा है। नासा के मौजूदा यान का लैंडर पिछले महीने मंगल पर उतरा था और इसने अपना अनवेषण कार्य शुरू कर दिया है।
वहीं, चीन का यान ‘तियानवेन-1’ मंगल ग्रह की कक्षा में चककर लगा रहा है और यह मई या जून में लाल ग्रह पर उतरने की तैयारी कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात का यान ‘होप’ मंगल की कक्षा में केवल चक्कर लगा रहा है और यह वहां उतरने की कोशिश नहीं करेगा। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के दो यान मंगल का चक्कर लगा रहे हैं।
अखबार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नासा ने चीन के साथ डेटा साझा करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस से अनुमति मांगी थी और चाइना नेशनल स्पेस एडमनिस्ट्रेशन से बात की जिसकी अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने सोमवार को पुष्टि की।
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