
बच्चे बिना सिखाए ही मम्मी-पापा की आदतों को अपनाने लगते हैं। ऐसे में पेरेंट्स का हर व्यवहार उनके लिए एक उदाहरण बन जाता है। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के सामने बेहद सोच-समझकर व्यवहार करें और अपशब्दों के इस्तेमाल से पूरी तरह बचें। साथ ही, उन्हें ऐसी सकारात्मक और हेल्दी आदतें अपनानी चाहिए, जिन्हें देखकर बच्चा भी अच्छी आदतें सीख सके और एक बेहतर इंसान बन सके।
मुझसे अक्सर पेरेंट्स यह कहते हैं कि उनका बच्चा हर चीज उनकी कॉपी करता है। कई बार इस वजह से वे खुलकर बात भी नहीं कर पाते हैं। दरअसल, बच्चों की इस आदत का कारण यह है कि माता-पिता उनके पहले रोल मॉडल होते हैं। इसलिए बच्चे उनके चलने-फिरने, उठने-बैठने, बोलने और यहां तक कि भावनात्मक प्रतिक्रियाओं की भी नकल करते हैं।
इसी वजह से पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने व्यवहार को लेकर सतर्क रहें और कुछ जरूरी सावधानियां बरतें, जैसे-अपनी भाषा पर हमेशा ध्यान दें और गुस्से में भी चीखने-चिल्लाने से बचें। क्योंकि अंततः बच्चे वही सीखते हैं, जो वे अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं।
बच्चों में नकल करने की यह आदत जन्म के पहले महीने से ही शुरू हो जाती है, लेकिन 3 से 7 साल की उम्र के बीच यह अपने चरम पर पहुंच जाती है। इस दौरान बच्चे अपने आसपास के माहौल, खासकर माता-पिता की हर छोटी-बड़ी हरकत को ध्यान से देखते हैं और उसे समझकर दोहराने की कोशिश करते हैं।
रोजमर्रा की इन आदतों की करते हैं काॅपी – इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि वे उनके खाने-पीने के तरीके, रोजमर्रा की दिनचर्या, जैसे- सोने-जागने का समय, साफ-सफाई की आदतें और दूसरों के साथ व्यवहार करने के तरीके, यहां तक कि फोन का यूज करने की आदत की भी नकल करने लगते हैं। वहीं, जब पेरेंट्स किसी काम पर ‘शाबाश’ या ‘गुड जॉब’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, तो बच्चा भी सराहना करना सीख जाता है। इस तरह धीरे-धीरे ये आदतें उनके व्यक्तित्व और व्यवहार का हिस्सा बन जाती हैं।
व्यक्तित्व पर पड़ता है इसका असर – बच्चे इस आदत के जरिए धीरे-धीरे सामाजिक नियमों को समझते हैं, नई आदतें विकसित करते हैं और लोगों के साथ सही तरीके से बातचीत करना सीखते हैं। पेरेंट्स का व्यवहार उनके व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करता है। यही कारण है कि माता-पिता का सकारात्मक व्यवहार, जैसे दया और धैर्य, बच्चों में आत्मविश्वास और सहानुभूति विकसित करता है, जबकि नकारात्मक व्यवहार उनके भीतर आक्रामकता और असुरक्षा जैसी भावनाएं पैदा कर सकता है।
पेरेंट्स इन 10 बातों का रखें ध्यान – माता-पिता को बच्चों के इस व्यवहार को ध्यान में रखते हुए कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए, जिनकी जानकारी नीचे दी गई है। इससे बच्चे में अच्छी आदतों का विकास होता है और वह एक बेहतर व्यक्तित्व के रूप में उभरता है।
1. रोल मॉडल बनें: माता-पिता को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे बच्चों के लिए एक अच्छे रोल मॉडल बनें, क्योंकि बच्चे अपने पेरेंट्स को देखकर ही सबसे ज्यादा सीखते हैं।
2. भाषा पर दें ध्यान: रोजमर्रा की बातचीत में शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। विनम्र और दयालु भाषा का प्रयोग करें, ताकि बच्चा भी यही व्यवहार सीख सके।
3. तनाव में भी शांत रहें: पेरेंट्स को कोशिश करनी चाहिए कि वे तनाव की स्थिति में भी शांत रहें, क्योंकि बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं।
4. बातचीत में धैर्य रखें: बच्चों से बात करते समय कभी अपना आपा न खोएं। धैर्य बनाए रखें और क्रोध या निराशा को खुद पर हावी न होने दें।
5. स्वस्थ आदतें अपनाएं: अच्छा खान-पान और नियमित व्यायाम जैसी हेल्दी आदतें अपनाएं। आपको देखकर बच्चा भी इन आदतों को सीखता है।
6. स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण रखें: अगर आप चाहते हैं कि बच्चा स्क्रीन टाइम कंट्रोल में रहे, तो सबसे पहले खुद अपनी स्क्रीन की आदतों को नियंत्रित करें।
7. अच्छे व्यवहार की सराहाना करें: बच्चे के अच्छे व्यवहार की तारीफ करें और उसे प्रोत्साहित करें, ताकि वह दयालु और सकारात्मक बन सके।
8. घर का माहौल सकारात्मक रखें: घर में शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखें। चिल्लाने या नकारात्मक प्रतिक्रियाओं से बचें।
9. क्वालिटी टाइम बिताएं: बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और उनसे खुलकर बातचीत करें, ताकि उनका आत्मविश्वास बढ़े।
10. सिखाएं जीवन के मूल्य: सम्मान, ईमानदारी और सहानुभूति जैसे मूल्यों को अपने व्यवहार के जरिए सिखाएं, ताकि बच्चा इन्हें जीवन में अपनाकर एक बेहतर इंसान बन सके।
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