
पिछले दिनों ग्लोबल आईटी कंपनी ऑरेकल ने अचानक भारत से 12,000 एंप्लॉयीज की छंटनी का ऐलान कर दिया। यह इन पेशेवरों के लिए दुःस्वप्न से कम नहीं था। इनमें से ज्यादातर ऊंचे पदों पर थे और उन्हें मोटी सैलरी मिल रही थी। इसी तरह, दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी ऐमेजॉन ने भी पिछले दिसंबर-जनवरी में 14,000-16,000 लोगों की छंटनी की थी। आईटी इंडस्ट्री में यह डर बना हुआ है कि छंटनी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। इसकी वजह है आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दखल।
ऑरेकल में छंटनी: AI कम खर्च में कई लोगों को काम कर सकता है। डिवेलपर-कोडिंग जैसे काम भी। इससे बड़े पैमाने पर इंडस्ट्री में छंटनी का डर बना हुआ है। इससे बेरोजगारी बढ़ने की आशंका तो है ही। इससे खपत में कमी आने का भी डर है। दरअसल, ऑरेकल से जिस तरह के पेशेवर निकाले गए, उनकी आय अधिक थी। यह वर्ग टैक्स भी ज्यादा देता है और खर्च भी जमकर करता है।
टैक्स देने वाले कम: भारत में इनकम टैक्स रिटर्न 8 करोड़ से अधिक लोग फाइल करते हैं, लेकिन उनमें से 63% किसी तरह का टैक्स नहीं देते। कुल आबादी का 1.5% ही टैक्स देता है। उनमें से भी ज्यादातर डेढ़ लाख रुपये टैक्स देते हैं। सिर्फ एक फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनका कुल टैक्स कलेक्शन में योगदान 50% है, जबकि 9% का योगदान 87%।
छंटनी रोकने के हों उपाय – IT में छंटनी से मांग घटने का डर
केंद्र की टैक्स इनकम पर भी होगा असर
सरकार लगाए डिजिटल लेबर टैक्स
खपत आधारित इकॉनमी: ऑरेकल जैसी मल्टीनैशनल कंपनियों में कर्मियों की सैलरी काफी अच्छी होती है। खासतौर पर मिड लेवल अधिकारियों की तो और भी ज्यादा। इसलिए टैक्स और खपत के लिहाज से उनका देश की इकॉनमी में योगदान भी अहम होता है। भारत की इकॉनमी यूं भी खपत आधारित है। इसका ग्रॉस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट (GDP) में योगदान 60% के करीब है।
खपत घटने का डर: लेकिन हाई इनकम ग्रुप के लोगों की नौकरियां जाने से खपत को धक्का लगेगा। पहली बात तो यह है कि जिन लोगों की नौकरियां जाएंगी, वे खर्च पर लगाम लगाएंगे। इसका असर कारों की बिक्री, लग्जरी गुड्स के बाजार, रियल एस्टेट जैसे सेक्टर पर पड़ेगा। यही नहीं, छंटनी देखकर इंडस्ट्री के बाकी लोगों में भी नौकरी को लेकर असुरक्षा बढ़ेगी। इसलिए वे भी खर्च पर लगाम लगाने की कोशिश करेंगे। उनकी भी कोशिश बुरे वक्त के लिए बचत करने की होगी। इनका असर देश की इकॉनमी पर पड़ना तय है।
ग्रोथ पर असर: हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अनुमानित ग्रोथ अच्छी रहने की उम्मीद है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपने हालिया अनुमान में बताया कि इस वित्त वर्ष में ग्रोथ 6.9% रह सकती है। यह पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल-गैस की कीमतों में आई उछाल को देखते हुए अच्छी कही जा सकती है। लेकिन क्या इसमें AI से आईटी इंडस्ट्री में मची उथलपुथल से पड़ने वाले असर को शामिल किया गया है? फिर इस साल अल निनो की वजह से मॉनसूनी सीजन में बारिश भी सामान्य से कम हो सकती है। इसका भी कृषि के साथ खपत पर बुरा असर पड़ेगा।
डिजिटल लेबर टैक्स: क्या सरकार को टैक्स इनकम बढ़ाने के लिए डिजिटल लेबर टैक्स लगाना चाहिए? अगर आईटी कंपनियां AI एजेंट का इस्तेमाल कर अपना मुनाफा बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं तो क्या केंद्र को डिजिटल लेबर टैक्स नहीं लगाना चाहिए! भारत में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए ऐसा एक टैक्स पहले लगाया गया था। अब डिजिटल लेबर टैक्स लगाने का समय आ गया है।
केंद्र बनाए नीति: भारत में लगभग 60 लाख लोग आईटी इंडस्ट्री में काम करते हैं। इनका देश की तरक्की में बड़ा योगदान रहा है। इसलिए आगे भी इस उद्योग का मजबूत रहना जरूरी है। AI के इस्तेमाल के कारण कंपनियां छंटनी न करें, इसके लिए सरकार चाहे तो इंसेंटिव भी दे सकती है। वैसे, अभी भारतीय आईटी कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी नहीं कर रही हैं, लेकिन उन्होंने कई तरह के जॉब्स में नियुक्तियां बंद कर दी हैं। इससे क्वॉलिटी रोजगार पर बुरा असर पड़ रहा है। केंद्र सरकार को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की वजह से बदले हुए माहौल को देखते हुए नीतिगत रास्ते तलाशने होंगे।
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