
जिम्बाब्वे में खसरे से पीड़ित 157 बच्चों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक इन बच्चों के परिवारों के धार्मिक विश्वासों की वजह से ज्यादातर का खसरे से बचाव के लिए टीकाकरण नहीं कराया गया था। खसरे का संक्रमण पहली बार अप्रैल की शुरुआत में जिम्बाब्वे के पूर्वी मानिकलैंड प्रांत में सामने आया था और उसके बाद से यह देश के सभी हिस्सों में फैल चुका है। जिम्बाब्वे की सूचना मंत्री मोनिका मुत्स्वंग्वा के मुताबिक अब तक देश में खसरे के कम से कम 2,056 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। जिम्बाब्वे की कैबिनेट ने खसरे के संक्रमण को रोकने के लिए एक कानून लागू किया है।
जिम्बाब्वे की सरकार का कहना है कि वह छह महीने से 15 साल की उम्र के बच्चों को लक्षित करके बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू कर रही है और इस अभियान का समर्थन करने के लिए धार्मिक नेताओं को इसमें शामिल कर रही है। खसरा दुनिया में सबसे अधिक संक्रामक रोगों में से एक है और यह खांसने, छींकने या निकट संपर्क से हवा में फैलता है।
इसके लक्षणों में खांसी, बुखार और त्वचा पर लाल चकत्ते निकलना शामिल हैं। टीकाकरण नहीं कराने वाले बच्चों में इस बीमारी के गंभीर रूप लेने की आशंका अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोविड-19 महामारी के कारण टीकाकरण अभियान प्रभावित होने की वजह से अप्रैल में कुछ देशों में खसरे के मामलों में वृद्धि की चेतावनी दी थी।
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