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अधोमुख श्वानासन से हेल्दी रहेंगी दिमाग की नसें, कम होगा स्ट्रोक का खतरा, 4 और आसन भी करते हैं मदद


सुस्त जीवनशैली और लगातार काम की वजह से लोगों को हाई बीपी, मोटापा, तनाव और डायबिटीज आदि रोगों का जोखिम बढ़ गया है। इन सभी कारको के लंबे समय तक बने रहने से ब्रेन हेल्थ प्रभावित होती है, जिससे ब्रेन स्ट्रोक होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। यह ब्रेन की नर्व से जुड़ी समस्या है, लेकिन एक्सपर्ट बताते हैं कि समय रहते योग और ध्यान आदि से आप इस समस्या के खतरे को कम कर सकते हैं।
समय के साथ लोगों की जीवनशैली में कई तरह के बदलाव देखने को मिले हैं। यह बदलाव कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को जन्म देने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। जानकार बताते हैं कि मोटापा, लगातार तनाव, स्ट्रेस, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज हार्ट के साथ ही ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों के जोखिम को बढ़ा देते हैं। ब्रेन स्ट्रोक दुनिया भर में विकलांगता और मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। कई एक्सपर्ट्स बताते हैं कि नियमित योगाभ्यास ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, तनाव कम करने, ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने और हृदय स्वास्थ्य को मजबूत करने में मदद कर सकता है। ये सभी कारक स्ट्रोक के जोखिम से जुड़े हैं। आगे जानते हैं ब्रेन स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए आपको किन योगासनों का नियमित अभ्यास करना चाहिए।
योग स्ट्रोक से बचाव में कैसे मदद कर सकता है? – योग सीधे तौर पर स्ट्रोक को रोकने का दावा नहीं करता, लेकिन यह कई जोखिम कारकों को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। एनसीबीआई की स्टडी से पता चलता है कि नियमित योगाभ्यास ब्लड प्रेशर को सामान्य करने, रेगुलर स्ट्रेस को कम करने और शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को सही बनाए रखने में सहायक हो सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ योग को हृदय और मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानते हैं।
साथ ही, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार योग मानसिक तनाव कम करके और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य (कॉग्नेटिव हेल्थ) को बेहतर बनाकर मस्तिष्क की सुरक्षा में भूमिका निभा सकता है।
अधोमुखासन (Designed By Magnific)- यह आसन शरीर को उल्टे V आकार में लाने पर आधारित है। इसे डाउनवर्ड फेसिंग डॉग पोज भी कहा जाता है। स्टडी के अनुसार यह आसन ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर करने में मदद करता है। कंधों, पीठ और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। तनाव कम करने और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इससे ब्रेन हेल्थ बेहतर होती है और कई गंभीर रोगों का जोखिम कम होता है। लेकिन, इसको योग एक्सपर्ट की देखरेख में डॉक्टर की अनुमति के बाद ही करना चाहिए।
ब्रेन के लिए वृक्षासन (Designed By Magnific) – वृक्षासन में एक पैर पर संतुलन बनाकर खड़ा हुआ जाता है। इसके संभावित फायदो में शरीर का संतुलन बेहतर होता है। नर्वस सिस्टम को सक्रिय करने में मदद करता है। एकाग्रता और मानसिक स्थिरता बढ़ाता है। उम्र बढ़ने के साथ गिरने और संतुलन खोने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। स्टडी बताती है कि योग से आप मेंटल एक्टिविटी को बूस्ट कर सकते हैं।
वीरभद्रासन 2 (Warrior II Pose) –
warrior 2 pose
वीरभ्रदासन (Designed By Magnific) – यह आसन खड़े होकर किया जाता है। यह पेरों और कोर मसल्स को मजबूत करता है। इसके साथ ही छाती और फेफड़ों को खोलकर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में सुधार करता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन में सुधार आता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, और यह आसन उसी दिशा में मदद करता है।
ब्रेन के लिए ब्रिज पोज (Designed By Magnific)
इसे ब्रिज पोज भी कहा जाता है। इस आसन में शरीर को ब्रिज के आकार का बनाया जाता है। इससे रीढ़ की हड्डी की अकड़न दूर होती है। साथ ही, तनाव और थकान में भी यह आसन फायदेमंद होता है और ब्लड सर्कुलेशन में भी सुधार करता है। कुछ अध्ययनों में योग को रक्तचाप नियंत्रण और हृदय स्वास्थ्य सुधार से जोड़ा गया है, जो स्ट्रोक जोखिम कम करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भुजंगासन के फायदे (Designed By Magnific)
भुजंगासन या कोबरा पोज पीठ को पीछे की ओर मोड़कर किया जाता है। इससे रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाता है। यह छाती और फेफड़ों को फैलाता है। साथ ही, ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाकर तनाव को कम करने और एनर्जी को बढ़ाने में मदद करता है। एनसीबीआई की स्टडी के मुताबिक डायबिटीज में याददाश्त तेजी से कम हो सकती है, इससे बचने के लिए प्राणायाम जैसे भुजंगासन आदि फायदेमंद होते हैं।
स्ट्रोक से बचाव के लिए अतिरिक्त टिप्स
रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।
रक्तचाप और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
पर्याप्त नींद लें।
मेडिटेशन और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
वजन को कंट्रोल में रखें।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
नियमित और सही तरीके से किया गया योग स्वस्थ जीवनशैली का प्रभावी हिस्सा बन सकता है और लंबे समय में मस्तिष्क तथा हृदय दोनों की सुरक्षा में मदद कर सकता है। लेकिन, इसे करने से पहले आपको डॉक्टर से सलाह अवश्य लेनी चाहिए और ट्रेनर की देखरेख में ही योग प्रैक्टिस करनी चाहिए।