
भारत के साथ पिछले साल मई महीने के संघर्ष के बाद पाकिस्तानियों ने डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तेल मालिश की। पाकिस्तान ने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को स्वीकार किया और नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट भी किया। ट्रंप ने कई बार पाकिस्तान के आर्मी चीफ की सार्वजनिक मंचों से तारीफ भी की, लेकिन फिर नये साल के पहले महीने में ही पाकिस्तान को उन 75 देशों की लिस्ट में डाल दिया, जिनपर बैन लगाया गया है। सबसे खास बात ये है कि जिस दिन अमेरिका ने पाकिस्तान को वीजा बैन वाले देशों की लिस्ट में डाला, उसी समय असीम मुनीर और पाकिस्तान के डीजी ISI ने क्रिप्टो माइनिंग को लेकर ट्रंप की वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल के साथ एक डील साइन की। इसीलिए पाकिस्तानी अब कह रहे हैं कि असीम मुनीर डोनाल्ड ट्रंप को निजी फायदे दे रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान को लेकर ट्रंप का नजरिया नहीं बदला है।
पाकिस्तानियों ने अब पूछना शुरू कर दिया है कि “डोनाल्ड ट्रंप की इतनी खुशामद करने का क्या फायदा हुआ?” पाकिस्तान के लिए शर्मनाक स्थिति और खराब तब हुई जब वीजा बैन लगने की अगली सुबह पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने X पर लिखा, कि पाकिस्तान की पासपोर्ट रैंकिंग 126वें से बढ़कर 98वें स्थान पर आ गई है और “यह सिलसिला जारी रहेगा”। लेकिन उनके इस दावे की जियो न्यूज के पत्रकार बेनजीर शाह ने सिर्फ 2 मिनट में ही हवा निकाल दी। उन्होंने कहा कि सरकार गुमराह करने की कोशिश कर रही है। उनके अलावा जाने-माने एनालिस्ट हुसैन हक्कानी जैसे दूसरे लोगों ने भी इस पर अपनी राय दी है।
Home / News / ट्रंप की नोबेल पुरस्कार वाली तेल मालिश नहीं आई काम, US ने किया वीजा बैन, मुनीर पर बरसे पाकिस्तानी
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