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पैसे नहीं दिए तो हेड कोच और खिलाड़ियों को किया अपमानित, भारतीय फुटबॉल फिर हुआ शर्मसार


भारतीय फुटबॉल एक बार फिर शर्मसार हुआ है। कोच्चि के जवाहरलाल नेहरू इंटरनेशनल स्टेडियम में एएफसी एशियाई कप क्वालीफायर से पहले भारतीय मुख्य कोच खालिद जमील और तीन स्टार खिलाड़ियों को सुरक्षाकर्मियों ने गेट पर ही रोक दिया। करीब एक दशक बाद कोच्चि में होने वाले राष्ट्रीय टीम के मैच से पहले इस घटना ने प्रशासनिक तालमेल की पोल खोल दी है।
मैदान के बाहर पेमेंट का ड्रामा, कोच और खिलाड़ी हुए अपमानित – भारत और हांगकांग के बीच 31 मार्च को होने वाले मुकाबले से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस निर्धारित थी। कोच खालिद जमील के साथ आशिक कुरुनियान, सहल अब्दुल समद और बिजय वर्गीस स्टेडियम पहुंचे, लेकिन ग्रेटर कोचीन डेवलपमेंट अथॉरिटी के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। रिपोर्टों के अनुसार, GCDA ने लगभग 20-25 लाख रुपये की सुरक्षा राशि और 3 लाख रुपये किराया जमा करने की मांग की थी। केरल फुटबॉल एसोसिएशन ने और समय मांगा, लेकिन भुगतान न होने तक अधिकारियों ने मुख्य गेट खोलने से मना कर दिया।
प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी बहाने – KFA के अध्यक्ष नवास मीरान ने स्थिति को संभालने की कोशिश करते हुए इसे एक मामूली तकनीकी समस्या बताया और आश्वासन दिया कि मैच तय समय पर ही होगा। हालांकि, इस तकनीकी समस्या की वजह से कोच और खिलाड़ियों को काफी देर तक बाहर इंतजार करना पड़ा और अंत वे बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस किए वहां से चले गए। पत्रकारों को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। यह पूरा मामला भारतीय फुटबॉल के लिए काफी चिंता का विषय है।
कोच्चि स्टेडियम का पुराना विवादित इतिहास – यह पहली बार नहीं है जब कोच्चि में ऐसी स्थिति पैदा हुई हो। इसी साल फरवरी में केरल ब्लास्टर्स के खिलाड़ियों को भी ISL मैच से पहले इसी तरह के भुगतान विवाद के कारण स्टेडियम में प्रवेश नहीं दिया गया था। बार-बार होने वाले ये विवाद भारतीय फुटबॉल की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, खासकर तब जब टीम 10 साल बाद कोच्चि के फैंस के सामने खेलने वाली है।