
आज के दौर में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां हजारों लोगों की छटनी कर रही है, वहीं AI पर अरबों डॉलर पानी की तरह बहा रही हैं। इसकी वजह से एक आम धारणा बनती है कि AI को इंसानों की जगह लेने के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि हकीकत कुछ और ही है।
दरअसल Nvidia जैसे दिग्गजों का कहना है कि आज AI को चलाने का खर्च कर्मचारियों के वेतन से कहीं ज्यादा है। कहने का मतलब है कि इंसान AI के मुकाबले में काफी सस्ते हैं। हालांकि, कंपनियां भारी खर्च और तकनीकी खामियों के बावजूद AI की ओर भाग रही हैं।(REF.)
इंसान सस्ता, AI महंगा – AI और इंसानों को लेकर NVIDIA के वाइस प्रेसिडेंट ब्रायन कटनजारो का कहना है कि उनके लिए AI की लागत इंसानो से कई गुना ज्यादा है। MIT की एक रिसर्च भी इसकी पुष्टि करता है। मौजूदा समय में सिर्फ 23% विजन-आधारित नौकरियों में ही AI का इस्तेमाल आर्थिक रूप से फायदेमंद है। बाकी 77% मामलों में इंसानों से काम कराना आज भी सस्ता पड़ता है।
इसके बावजूद, मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, टेक कंपनियों ने इस साल AI बुनियादी ढांचे पर 740 खरब डॉलर खर्च करने की घोषणा की है, जो पिछले साल से 69% ज्यादा है।
मेरी टीम के लिए, कंप्यूट (AI चलाने की शक्ति और संसाधनों) की लागत, कर्मचारियों की लागत से कहीं अधिक है।
टेक्निकल समस्याओं के बावजूद भारी बजट – AI की बढ़ती हुई लागत ने कई बड़े अधिकारियों को परेशान कर दिया है। उबर के सीटीओ का कहना है कि AI टूल्स अपनाने की वजह से उनका बजट पहले के मुकाबले काफी ज्यादा बढ़ गया है। यहां समस्या सिर्फ खर्च की नहीं, बल्कि भरोसे की भी है।
AI के सस्ते होने का इंतजार? – रिपोर्ट के अनुसार एक्सपर्ट कीथ ली का मानना है कि यह थोड़े समय की बात है। आज के समय में हार्डवेयर की कमी और बिजली की खपत AI को महंगा बना रही है लेकिन गार्टनर की रिपोर्ट बताती है कि अगले चार सालों में बड़े AI मॉडल्स को चलाने की लागत 90% तक गिर सकती है।
इस रिपोर्ट में ऐसा भी बताया गया है कि भविष्य में AI कंपनियां इस्तेमाल के आधार पर पैसा लेंगी। इसके अलावा AI के इंसानों की जगह लेने के बारे में तभी सोचा जा सकता है जब वे सस्ता हो और गलतियां ना करता हो। फिलहाल ऐसा जल्द होता नहीं दिखता।
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