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‘सोनिया-खरगे को वंदे मातरम से चिढ़’, बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर लगाया राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप; माफी की मांग


कांग्रेस मुख्यालय में 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गायन के समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी के आपस में बातचीत करते दिखाई देने पर विवाद खड़ा हो गया। बीजेपी ने इस पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए वंदे मातरम के अपमान करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम गायन को लेकर हुए विवाद पर पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने कहा, ‘वंदे मातरम को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। यह राष्ट्रीय गीत है और पूरे देश ने इसे स्वीकार किया है, यहां तक ​​कि आजादी से पहले की कांग्रेस ने भी इसे अपनाया था। मुझे दुख है कि ऐसे मौकों पर बेवजह विवाद खड़े किए जाते हैं और वंदे मातरम पर सवाल उठाए जाते हैं। अगर भारत सरकार ने कहा है कि किसी भी बैठक से पहले इसे गाया जाना चाहिए, तो इसका पालन किया जाना चाहिए।’
‘वंदे मातरम को रोकने का प्रयास हुआ’ – भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, ‘ये देश जानता है कि वे कितने असहज हो रहे थे जब वंदे मातरम गाया जा रहा था। ये वंदे मातरम को रोकने का प्रयास हुआ है। ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।’
‘वंदे मातरम चला तो परेशान हो उठे सोनिया-खरगे’ – कांग्रेस के वंदे मातरम विवाद पर मनोज तिवारी ने कहा, ‘कल कांग्रेस ने देश और दुनिया को अपना असली स्वरूप दिखा दिया है। उन्हें वंदे मातरम से इतनी चिढ़ है। कल जैसे ही पूर्ण वंदे मातरम् चला तो आपने देखा कि सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे कितना परेशान हो गए।’
दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने कांग्रेस नेतृत्व पर वंदे मातरम का अपमान करने के आरोपों पर कहा, ‘जब राष्ट्र गीत चल रहा था, उस समय सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे और पूरी व्यवस्था में वंदे मातरम का अपमान करने की नीयत दिखाई दे रही है। जब तक कांग्रेस सत्ता में रही, तब तक उन्होंने इस देश में कभी पूरा वंदे मातरम होने भी नहीं दिया। ये बताता है कि गांधी परिवार आज भी भारत से जुड़े प्रतीकों का सम्मान करना सीख नहीं पाया है।’
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस से की माफी की मांग – बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भारत के इतिहास के इस महत्वपूर्ण क्षण में कांग्रेस मुख्यालय में दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य देखने को मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी, नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे राष्ट्रीय गीत के दौरान गंभीरता से खड़े नहीं थे, बल्कि आपस में बातचीत कर रहे थे और किसी को बुला रहे थे। यह ‘वंदे मातरम’ के प्रति कांग्रेस का अनादर दिखाता है।
उन्होंने कहा, ‘यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी ने अभी तक ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण संस्करण को स्वीकार नहीं किया है। हम कांग्रेस नेतृत्व के व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं। उनसे माफी तथा स्पष्टीकरण की मांग करते हैं।’ भाजपा नेता ने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस माफी नहीं मांगती है, तो इससे संविधान, राष्ट्र और देशभक्ति के प्रति उसकी वास्तविक सोच सामने आएगी। कांग्रेस का स्वतंत्रता संग्राम के प्रति सम्मान भी सवालों के घेरे में है।
प्रदीप भंडारी ने भी की कांग्रेस की आलोचना – भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘सोनिया गांधी और राहुल गांधी ‘वंदे मातरम’ सुनते समय नाराज दिख रहे थे। सोनिया गांधी ने राहुल गांधी की ओर देखा और दोनों ने गीत को रुकवाने की कोशिश की। इससे साफ है कि कांग्रेस अब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नहीं रह गई है, बल्कि ‘दिमागी नक्सल कांग्रेस’ बन गई है।’
वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मामले पर सफाई देते हुए कहा, ‘राष्ट्रीय गीत को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे। सोनिया गांधी केवल यह कह रही थीं कि उनके लिए एक कुर्सी लाकर वहां रख दी जाए।’