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एंडोमेट्रियोसिस का इलाज करवाने से डायबिटीज का खतरा कम होगा? क्या है दोनों का कनेक्शन?


एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में होने वाली एक क्रॉनिक इंफ्लामेटरी स्थिति है, जिसमें यूट्रस की अंदरूनी परत जैसे टिशू गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगते है। इसकी वजह से पीरियड में तेज दर्द, पेल्विक पेन, भारी ब्लीडिंग और कई बार फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। हाल में हुई स्टडी में यह पता चलता है कि एंडोमेट्रियोसिस को एक अन्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे टाइप 2 डायबिटीज के साथ जोड़ा गया है। इससे महिलाओं को डायबिटीज के कारण होने वाली अन्य समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
एंडोमेट्रियोसिस और ब्लड शुगर के बीच क्या कनेक्शन हो सकता है? – एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली स्थिति है। इस समस्या में यूट्रस की अंदुरूनी परत जैसे टिशू के बाहर विकसित होने लगती है। यह टिशू इंफ्लामेशन और स्कार टिशू फॉरमेशन से जुड़ा हो सकता है। WHO के अनुसार एंडोमेट्रियोसिस एक क्रोनिक डिजीज है और इम्यून सिस्टम डिसरेगुलेशन भी इसके साथ जुड़ी हुई दिखाई देती है।
दूसरी तरफ टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का प्रभाव ठीक तरह से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। जब इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ती है, तो ग्लूकोज को ब्लड से सेल्स में पहुंचाने में परेशानी होती है और ब्लड शुगर बढ़ सकती है।
इस अध्ययन की खास बात यह थी कि शोधकर्ताओं ने सभी एंडोमेट्रियोसिस केस को एक जैसा नहीं माना। रिस्क रोग के सब टाइप और महिला की मेटबॉलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग था।
सबसे मजबूत जुड़ाव अन्य जगह पर एंडोमेट्रियोसिस में देखा गया। स्टडी में प्रीमेनोपॉज वाली महिलाओं में डायबिटीज का जोखिम पोस्ट मेनोपॉज वाली महिलाओं की तुलना में ज्यादा मजबूत पाया गया। प्री मेनोपॉज वाली महिलाओं में तुलना करीब 1.55 फीसदी था।
एंडोमेट्रियोसिस होने पर क्या डायबिटीज की जांच करानी चाहिए? – सिर्फ एंडोमेट्रियोसिस होने के आधार पर हर महिला को डायबिटीज की बीमारी मान लेना सही नहीं है। लेकिन नई रिसर्च यह जरूर बताती है कि मेटाबॉलिक हेल्थ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर अगर अन्य जोखिम कारक भी मौजूद हों।
परिवार में डायबिटीज का इतिहास, बढ़ता वजन, कम फिजिकल एक्टिविटी, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल में उतार-चढ़ाव, या पहले जेस्टेशनल डायबिटीज जैसी स्थितियां टाइप 2 डायबिटीज के संपूर्ण जोखिम को प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से ब्लड ग्लूकोज या HbA1c टेस्टिंग की जरूरत के बारे में बात की जा सकती है।
क्या एंडोमेट्रियोसिस का इलाज करने से डायबिटीज का जोखिम कम हो जाएगा? – एनसीबीआई के अनुसार अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि एंडोमेट्रियोसिस का इलाज करने से टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम निश्चित रूप से कम हो जाता है। एंडोमेट्रियोसिस का इलाज मुख्य रूप से दर्द और अन्य लक्षणों को नियंत्रित करने, रोग के प्रभाव को कम करने और जरूरत पड़ने पर प्रजनन क्षमता को सपोर्ट करने पर केंद्रित होता है।
इसलिए किसी भी तरह के जोखिम में महिला को खुद से कोई दवा, सप्लीमेंट्स या डायबिटीज ट्रीटमेंट शुरू नहीं करना चाहिए। एंडोमेट्रियोसिस और मेटाबॉलिक हेल्थ दोनों के लिए अलग -अलग मेडिकल असेसमेंट ज्यादा महत्वपूर्ण है।
इस नई स्टडी ने लोगों को एंडोमेट्रियोसि और टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम पर अपना ध्यान खींचा है। इस रिसर्च में करीब 29.4 लाख लोगों के रिकॉर्ड्स पर आधारित एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में Type 2 Diabetes का जोखिम करीब 46 फीसदी अधिक पाया गया। कुछ सबटाइप्स, प्रीमेनोपॉज, और BMI 30 से कम वाली महिलाओं में डायबिटीज का जोखिम अधिक पाया गया है।