
कभी-कभी किसी तनावपूर्ण स्थिति, लगातार चिंता या एंग्जायटी के दौरान अचानक त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली या छोटे-छोटे उभरे हुए निशान दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या एंग्जायटी या स्ट्रेस खुद स्किन रैश का कारण बन सकते हैं? दरअसल, एंग्जायटी अपने आप में हर तरह के रैश की वजह नहीं होती है, लेकिन साइकोलॉजिकल स्ट्रेस शरीर के नर्वस सिस्टम, हार्मोनल और इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। इससे कुछ लोगों में पहले से मौजूद स्किन से जुड़ी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। ऐसे में इनको एंग्जायटी रैश भी कहा जाता है।
क्या एंग्जायटी या स्ट्रेस से स्किन पर रैश हो सकता है? – स्ट्रेस और एंग्जायटी कुछ लोगों में रैश या स्किन लक्षणों को ट्रिगर या बढ़ा सकते हैं, लेकिन हर रैश को स्ट्रेस रैश कहना सही नहीं होगा। एनसीबीआई के अनुसार साइकोलॉजिकल स्ट्रेस के दौरान शरीर का हाइपोथैलेमिक पिट्यूटरी एड्रेनल (hypothalamic-pituitary-adrenal HPA) एक्सिस और सम्पैथिटिक नर्वस सिस्टम (sympathetic nervous system) सक्रिय होता है। इससे तनाव वाले हार्मोन जैसे कोर्टिसोल, एड्रेनालाइन और अन्य न्यूरोएंडोक्राइन मीडियेट्स (neuroendocrine mediators) में बदलाव होते हैं। त्वचा में मौजूद नसों और इम्यून सेल्स इन सिग्नल्स से प्रभावित हो सकते हैं।
स्ट्रेस के दौरान शरीर में कौन-से हार्मोनल बदलाव होते हैं? – एनसीबीआई के अनुसार जब व्यक्ति किसी तनावपूर्ण स्थिति का सामना करता है, तो ब्रेन से स्ट्रेस रिस्पॉन्स पाथवे सक्रिय होते हैं। HPA axis के माध्यम से CRH (corticotropin-releasing hormone) और उसके बाद ACTH (adrenocorticotropic hormone) का रिलीज बढ़ता है, जिससे एड्रेनल ग्लैंड कोर्टिसोल रिलीज करती हैं। साथ ही सम्पैथिटिक नर्वस सिस्टम एड्रेनलाइन और नोरएड्रेनलाइन जैसे मीडियेट्स के जरिए शरीर को “लड़ो या भागो” रिस्पॉन्स के लिए तैयार करता है।
कोर्टिसोल शरीर की स्ट्रेस रिस्पॉन्स को रेगुलेट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन साइकोलॉजिकल स्ट्रेस का असर केवल हार्मोन्स तक सीमित नहीं रहता। त्वचा में मौजूद इम्यून सेल्स और नर्व एंडिंग (nerve endings) भी स्ट्रेस से जुड़े सिग्नल्स को रिस्पॉन्ड करते हैं।
स्ट्रेेस और रैशेज के बीच क्या कनेक्शन है (Designed By Magnific) – पित्ती (Urticaria या Hives), जिसे आम भाषा में हाईव्स भी कहा जाता है, त्वचा पर अचानक बनने वाले उभरे हुए, खुजलीदार गोलेनुमा उभार की स्थिति है। ये शरीर के किसी भी हिस्से पर दिखाई दे सकते हैं और अलग-अलग आकार के हो सकते हैं।
एनसीबीआई के अनुसार पित्ती में मास्ट सेल्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब ये सेल्स एक्टिवेट होते हैं, तो हिस्टैमाइन सहित कई इंफ्लामेटरी तत्व रिलीज हो सकते हैं। इससे नसें प्रभावित होती हैं और त्वचा पर लाल रंग के छोटे-छोटे आकार वाले गोले की तरह उभार दिखाई दे सकता है। स्ट्रेस और क्रोनिक हाईव्स (chronic urticaria) के बीच संबंध को लेकर रिसर्च में न्यूरो इम्यून कम्यूनिकेशन पर काफी ध्यान दिया गया है।
स्ट्रेस से स्किन में खुजली क्यों बढ़ सकती है? – एनसीबीआई के अनुसार खुजली न सिर्फ ज्यादा एंग्जायटी से जुड़ी है, बल्कि यह भी देखा गया है कि स्ट्रेस खुजली को और बढ़ा देता है, जिससे खुजली और एंग्जायटी का एक चक्र बन जाता है। लंबे समय से खुजली की समस्या से जूझ रहे कई मरीज बताते हैं कि मानसिक तनाव एक ऐसा कारण है जो उनकी खुजली को और बढ़ा देता है।
अगर स्ट्रेस किसी व्यक्ति में हाईव्स ट्रिगर करता है, तो रैश आमतौर पर: – लाल या स्किन के रंग के उभरे हुए पैच या उभार के रूप में दिख सकता है।
इसमें तेज खुजली हो सकती है।
अलग-अलग आकार के गोले बन सकते हैं।
एक जगह का रैश कम होकर दूसरी जगह दिखाई दे सकता है।
गर्मी, पसीना या भावनात्मक तनाव के साथ लक्षण बढ़ सकते हैं।
अगर स्ट्रेस और एंग्जायटी के समय अचानक खुजलीदार, उभरे हुए लाल पैच दिखाई देते हैं और वे आते-जाते रहते हैं, तो पित्ती एक संभावित कारण हो सकता है। लेकिन सही जांच के लिए रैश का दिखाना, समय, दवा, आहार, संक्रमण और दूसरे ट्रिगर्स को भी समझना जरूरी होता है। लगातार या गंभीर लक्षण को केवल एंग्जायटी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
Home / Lifestyle / ज्यादा चिंता करने से शरीर पर निकलते हैं लाल चकत्ते, टेंशन और स्ट्रेस लेने वाले हो जाएं सावधान
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