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‘मुझे गंभीरता से नहीं लेते थे’, व्‍हाट्सएप से जोड़े ग्राहक, ₹3 लाख से शुरू किया ऐसा काम कि अब ₹20 करोड़ की कंपनी


संजना त्रिपुरमल्लू आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की रहने वाली हैं। वह नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) अहमदाबाद से पासआउट हैं। उन्‍होंने कुछ ही सालों में एक सफल कारोबार खड़ा कर दिया है। इसकी नींव संजना ने 2021 में सिर्फ 3 लाख रुपये से रखी थी। उनके स्‍टार्टअप का नाम ‘कॉस्‍मॉस डायमंड्स’ है। बेंगलुरु का यह स्‍टार्टअप लैब-ग्रोन डायमंड की बिक्री करता है। इस ब्रांड ने पारदर्शिता और ‘100% बायबैक’ पॉलिसी के दम पर 20 करोड़ रुपये के रेवेन्‍यू का आंकड़ा छू लिया है। आइए, यहां संजना त्रिपुरमल्‍लू की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
NID अहमदाबाद से पासआउट संजना त्रिपुरमल्लू ने अपने करियर की शुरुआत सैमसंग से की। साल 2020 में अपनी सगाई के लिए उन्‍हें मनपसंद नीले-हरे रंग के हीरे की अंगूठी चाहिए थी। इस तलाश के दौरान उन्हें पारंपरिक डायमंड मार्केट की भारी अनिश्चितताओं और कीमतों के बड़े अंतर का अहसास हुआ। डीप रिसर्च के दौरान उन्हें खनन किए गए हीरों के पीछे के अवैध व्यापार का सच पता चला। इसके बाद उन्होंने लैब-ग्रोन डायमंड तकनीक के बारे में जाना। पर्यावरण के अनुकूल और शत-प्रतिशत समान क्‍वालिटी वाले इस विकल्प ने संजना को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने गुजरात के मैन्‍युफैक्‍चरर्स से संपर्क कर खुद की सगाई की अंगूठी तैयार की। फिर दोस्तों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसे एक व्यावसायिक रूप देने का फैसला किया।
सिर्फ 3 लाख रुपये से शुरुआत – साल 2021 में संजना ने अपने बेडरूम से 3 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी से स्‍टार्टअप की नींव रखी। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ग्राहकों को जोड़ना शुरू किया। उस समय बाजार में लैब-ग्रोन डायमंड्स को लेकर भारी गलतफहमियां थीं। लोग इन्हें ‘नकली’ मानते थे। यहां तक कि कारीगर भी इनके साथ काम करने से कतराते थे। इस झिझक और पूर्वाग्रहों को दूर करने के लिए संजना ने ग्राहकों को जागरूक करने के मकसद से यूट्यूब पर वीडियो बनाने शुरू किए। ये काफी वायरल हुए। इसके बाद उन्होंने 2023 में विजयवाड़ा में अपना पहला फिजिकल स्टोर खोला। इसने पहले ही महीने से मुनाफा देना शुरू कर दिया। एक इंटरव्‍यू में उन्‍होंने बताया, ‘कारीगर कहते थे कि यह असली हीरा नहीं है। वे इस पर काम नहीं करेंगे। निजी तौर पर वे मुझे गंभीरता से भी नहीं लेते थे। मुझसे अकेले आने के बजाय पिता को साथ लाने को कहते थे।’
स्‍टार्टअप ने वित्त वर्ष 2025-26 में 20 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू दर्ज किया। इसमें से 35% बिक्री ऑनलाइन माध्यम से हुई। कंपनी की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धि जुलाई 2026 में स्काईरूट एयरोस्पेस के ‘विक्रम-1’ रॉकेट मिशन का हिस्सा बनना रही। इस स्पेस मिशन में कंपनी के बनाए 16.16 कैरेट के कमल के फूल के आकार का लैब-ग्रोन डायमंड अंतरिक्ष में भेजा गया। इस प्रयोग ने यह साबित कर दिया कि लैब-ग्रोन डायमंड्स बेहद मजबूत और टिकाऊ होते हैं। इससे बाजार में इनकी मजबूती को लेकर चल रहे तमाम संदेहों पर विराम लग गया।
बड़ा है आगे का प्‍लान – आज कंपनी में 5,000 रुपये से लेकर 30 लाख रुपये तक के आईजीआई सर्टिफाइड गहने उपलब्ध हैं। इनका डिजाइन पारंपरिक भारतीय विरासत से प्रेरित है। 25 लोगों की टीम और चार डेडिकेटेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के साथ काम कर रही इस कंपनी का बेंगलुरु में एक्सपीरियंस स्टोर है। कंपनी की USP इसकी 100% बायबैक पॉलिसी है। यह ग्राहकों को पुराने गहने बदलकर नए लेने का विकल्प देती है। अब कंपनी हैदराबाद में नया स्टोर खोलने और भारतीय शैलियों को आधुनिक रूप में पेश करने वाले तीन नए कलेक्शंस लॉन्च करने की तैयारी में जुटी है।