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बच्‍चे को बात-बात पर झूठ बोलने की है आदत, ये काम करवा लें बस, बुराई से कर लेगा तौबा

बच्‍चे बहुत नादान होते हैं और उन्‍हें सही और गलत की ज्‍यादा पहचान नहीं होती है। पेरेंट्स ही बच्‍चों को सही और गलत की पहचान करना सिखाते हैं और बताते हैं कि उनके लिए क्‍या ठीक है और क्‍या उन्‍हें नुकसान पहुंचा सकता है।
अमूमन हर बच्‍चा कभी न कभी झूठ बोलता ही है लेकिन कुछ बच्‍चों के लिए यह आदत में शुमार हो जाता है। बच्‍चों का बात-बात पर झूठ बोलना या अपनी गलतियों को स्‍वीकार न करना, उनके व्‍यवहार को खराब कर सकता है। इसका असर आगे चलकर बच्‍चों के रिश्‍तों पर भी पड़ता है।
अगर आपका बच्‍चा झूठ बोलता है, तो उसे पहचान कर ऐसा दोबारा करने से रोकें। आप अपने बच्‍चे को यहां बताए गए कुछ तरीकों से झूठ बोलने से रोक सकते हैं।
​ईमानदारी को बनाएं पहला नियम : परिवार के नियमों और मूल्‍यों में आप सच बोलने और ईमानदारी को भी जोड़ दें। घर के नियमों में सच बोलने और ईमानदार बरतने पर भी जोर दें। इससे बच्‍चे को यह समझने का मौका मिलेगा कि सच कितना जरूरी होता है और बताने में मुश्किल होने पर भी हमें सच ही बोलना चाहिए।
बच्‍चे को समझाएं कि अलग-अलग तरह के झूठ से किस तरह नुकसान पहुंच सकता है। उसे बताएं कि कैसे लोग झूठ बोलते हैं और फिर उन्‍हें कैसे उसका भुगतान करना पड़ता है।
​पहले खुद बनें ईमानदार : टाइम्‍स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक आर्टिकल के अनुसार कहीं न कहीं आप भी इस बात से सहमत होंगे बच्‍चे अपने पेरेंट्स को देखकर ही सीखते हैं। आप जो भी करते हैं, बच्‍चे आपको देखकर उसे कॉपी करते हैं।
बच्‍चों को नहीं पता कि छोटा या बड़ा झूठ क्‍या है, उनके लिए आपके द्वारा बोली गई बात या तो झूठ है या सच। इसलिए मेट्रो में टिकट पर छूट पाने के लिए बच्‍चे की उम्र छिपाने जैसी गलतियां न करें। बच्‍चे को लगेगा कि जब उसके पेरेंट्स पब्लिकली झूठ बोल सकते हैं, तो फिर ऐसा करना सही ही होगा।
​एक्‍स्‍ट्रा करवाएं काम : अगर आपका बच्‍चा झूठ बोलते हुए पकड़ा जाता है तो उससे सजा के तौर पर कोई एक्‍स्‍ट्रा काम करवाएं। जैसे कि बच्‍चे से उसकी कोई पसंद की चीज छीनने की बजाय, उससे घर का कोई काम करवाएं।
इस बात का ध्‍यान रखें कि सजा उचित ही होनी च‍ाहिए। ऐसा न हो कि झूठ बोलने पर बच्‍चे को गलत सजा देने का बुरा असर भी बच्‍चे पर ही पड़ेगा। हद से ज्‍यादा गुजरने की कोशिश न करें। इससे बच्‍चा अपने पेरेंट्स के बारे में ही गलत सोच सकता है।
​तारीफ करना न भूलें : बच्‍चों का दिल बहुत मासूम और नाजुक होता है। जहां आपके डांटने पर वो रोने लगते हैं, तो वहीं आपकी छोटी-सी तारीफ से भी उनके चेहरे पर मुस्‍कान आ जाती है और वो मोटिवेट होते हैं। जब आपका बच्‍चा सच बोलता है तो उसकी तारीफ करें। उसे बताएं कि इस बात के बारे में सच बोलना कितना मुश्किल था, लेकिन आपको खुशी है कि उसने सच बोला।
जब बच्‍चे को आप झूठ बोलते हुए पकड़ लेते हैं, तो पहली बार उसे सिर्फ वॉर्निंग देकर छोड़ दें। दूसरी बार झूठ बोलने या बार-बार ऐसा करने पर ही बच्‍चे को कोई सख्‍त सजा देने के बारे में सोचें।