
उइगर मुस्लिमों पर चीन के अत्याचारों का एक और सबूत सामने आया है। नजरबंदी शिविरों को लेकर एक चीनी कार्यकर्ता गुआन गुआ ने खुफिया तरीके से इस बारे में खुलासा किया है। गुआन चीन के उरूमची शहर में एक पर्यटक बनकर पहुंचे थे। हालांकि अक्सर पर्यटक यहां नहीं आते इसलिए वह डरे हुए थे। उनके बैग पर एक खुफिया कैमरा लगा था जिससे उन्होंने खुफिया तरीके से कम्युनिस्ट सरकार के नजरबंदी शिविरों को रिकॉर्ड किया।
चीनी कार्यकर्ता को डर था कि अगर उसे पुलिस ने पकड़ लिया तो सरकार के अत्याचारों का खुलासा करने के जुर्म में उसे भयानक सजा दी जाएगी। गुआन इस क्षेत्र में दो सालों तक घूमते रहे और कैंप के बारे में जानकारियां जुटाते रहे। साहसी कार्यकर्ता ने अपने मिशन में री-एजुकेशन कैंप, डिटेंशन सेंटर और जेलों के दुनिया में सबसे क्रूर नेटवर्क का खुलासा किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ये शिविर झिंजियांग प्रांत में स्थित हैं जहां चीन की ओर से मुस्लिम अल्पसंख्यक, खासकर उइगरों का दमन किया जा रहा है।
अनुमान है कि चीन ने ऐसे शिविरों में करीब 20 लाख लोगों को नजरबंद कर रखा है। उन्हें पता चला कि स्कूलों में उइगर भाषा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जब उन्हें पता चला कि विदेशी पत्रकारों को यहां जांच करने से रोका जा चुका है तो गुआन ने इसका खुलासा करने का फैसला लिया। अपनी जान का जोखिम लेते हुए गुआन ने आठ शहरों की यात्रा और 18 कैंपों के बारे में पता लगाया।
इनमें एक विशालकाय शिविर भी शामिल था जो 1000 यार्ड में फैला हुआ था। इनमें से कई कैपों के बारे में नक्शे पर कोई नामो-निशान नहीं था। लेकिन उन्होंने कांटेदार तारों, गार्ड टावर, पुलिस चेकप्वाइंट, आर्मी बैरक, सेना की गाड़ियों और जेल के भीतर की दीवारों पर बने निशानों को रेकॉर्ड किया।रिपोर्ट के मुताबिक गुआन ने कहा कि यहां कई नजरबंदी शिविर हैं और सभी में मौजूद वॉचटावर से उन पर निगरानी की जाती है।
उन्होंने यूट्यूब पर अपने इस मिशन का वीडियो जारी किया है जो सिर्फ 19 मिनट में ही चीन के सबसे बड़े झूठ का पर्दाफाश कर देता है। गुआन ने शिविरों का पता लगाने के लिए एक रिपोर्ट में इस्तेमाल की गईं सैटेलाइट तस्वीरों की मदद ली थी। अपने मिशन के दौरान गुआन को यह डर था कि अगर वह पकड़े जाते हैं उन्हें भी इन्हीं कैंपों में भेज दिया जाएगा जिन्हें वह रिकॉर्ड करने आए हैं।
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