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चीन से खतरा, भारत समेत इन देशों की मदद से घातक पनडुब्बियों का बेड़ा तैयार कर रहा ताइवान

चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच ताइवान अपनी किलर पनडुब्बियों को तैनात करने के बेहद करीब है। ताइवान का गुप्त पनडुब्बी कार्यक्रम अमेरिका और ब्रिटेन के सहयोग से काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल में आई रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की स्वदेशी पनडुब्बी निर्माण परियोजना जल्द ही पूरा होने वाली है। जिसके बाद दक्षिण चीन सागर में इन पनडुब्बियों को चीन के खिलाफ तैनात किया जाएगा।
ताइवान को पनडुब्बी की तकनीक दे रहा ब्रिटेन : ताइवान के पनडुब्बी निर्माण प्रोग्राम में सबसे ज्यादा सहायता ब्रिटेन ने की है। पिछले तीन साल में ब्रिटेन ने अपने देश की कई कंपनियों को ताइवान को पनडुब्बियों के कंपोनेंट, सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी को निर्यात करने की मंजूरी दी है। ब्रिटेन के डिपॉर्टमेंट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच पनडुब्बी निर्माण पर सहयोग बढ़ा है।
भारत समेत छह देश कर रहे ताइवान की मदद : रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में ब्रिटिश नौसेना के सेवानिवृत्त कमोडोर इयान मैक्गी को ताइवान के पनडुब्बी निर्माण से जुड़ा करीबी व्यक्ति बताया गया है। दावा किया गया है कि उन्होंने ताइवान के पनडुब्बी प्रोग्राम के लिए जिब्राल्टर में स्थित इंजीनियर्स और पूर्व नौसैनिकों को भर्ती किया है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ताइवान ने कम से कम पांच अन्य देशों दक्षिण कोरिया, भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और स्पेन से इंजीनियरों, तकनीशियनों और पूर्व नौसेना अधिकारियों को काम पर रखा है।
ताइवान के पनडुब्बी निर्माण पर भड़का चीन : चीन ने इस रिपोर्ट के आने के बाद भारत और अमेरिका समेत 6 देशों को ताइवान को मदद करने को लेकर चेतावनी दी है। ताइवान को पनडुब्बी बनाने की तकनीक देने, सहायता करने को लेकर चीन ने कहा कि इस तरह के कदम से बीजिंग के साथ उनके द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। दावा किया जा रहा है कि ताइवान के पनडुब्बी निर्माण के लिए प्रस्तावित डिजाइन सौंपने वाली अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ की छह कंपनियों में कथित तौर पर भारत की भी एक कंपनी शामिल है।
चीन ने ताइवान के पास बढ़ाई सैन्य गतिविधियां : चीन शुरू से ही ताइवान के ऊपर अपना हक जताता आया है। यही कारण है कि चीनी सेना के वरिष्ठ जनरल से लेकर राजनेता तक ताइवान पर हमला कर कब्जा करने की धमकी दे चुके हैं। इस साल जनवरी में ही चीनी रक्षा मंत्रालय ने सख्त लहजे में कहा था कि ताइवान की स्वतंत्रता का ऐलान का मतलब ही युद्ध है। इस कारण चीन ने पिछले एक साल में ताइवान के आसपास अपनी सैन्य गतिविधियों को काफी तेज किया है। उधर, ताइवान ने भी अपने बचाव का संकल्प लेते हुए जंग की पूरी तैयारी की हुई है।
अटैक पनडुब्बियों से चीन को परेशान करेगा ताइवान : ताइवानी रक्षा मंत्री ने बताया कि अमेरिका से हमारे स्वदेशी पनडुब्बी बेड़े को घातक बनाने के लिए आवश्यक सभी संवेदनशील उपकरणों के लिए निर्यात परमिट को मंजूरी दी जा चुकी है। हमने आठ की संख्या में अटैक पनडुब्बियों का निर्माण पिछले साल नवंबर में शुरू किया था। ताइवान की पहली स्वदेशी पनडुब्बी 2023 में लॉन्च की जाएगी और 2025 तक इसे कमीशन किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका में जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद ताइवान के साथ रक्षा संबंधों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है।