
अगर आप भी अपने बच्चे को यह सोचकर दूध पिला देते हैं कि अगर वह खाने में नखरे दिखा रहा है तो कम से कम दूध ही पी ले, तो यह आदत सही नहीं है। क्योंकि ऐसा करने से बच्चों में एनीमिया, मोटापा और दांतों की सड़न जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पेरेंट्स इस बात का ध्यान रखें कि बच्चा केवल दूध पर निर्भर न हो।
आमतौर पर छह महीने की उम्र के बाद जब बच्चों को सॉलिड फूड देना शुरू किया जाता है, तो कई बच्चे अक्सर खाने में रुचि नहीं दिखाते और दूध की डिमांड करते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, छोटे बच्चे चाहे ब्रेस्टफीडिंग कर रहे हों या फॉर्मूला मिल्क ले रहे हों, वे दूध पीन अधिक पसंद करते हैं। लेकिन एक साल की उम्र के बाद बच्चों को दिनभर में लगभग 750 मिलीलीटर से ज्यादा दूध नहीं देना चाहिए। क्योंकि इससे वे फल, सब्जियां और जरूरी ठोस आहार कम खाता है, जिससे उसके शरीर को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते। साथ ही इस आदत की वजह से आयरन की कमी हो सकती है और एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है।
बच्चों को ज्यादा दूध देना क्यों ठीक नहीं है? – यह रिपोर्ट आगे बताती है कि बच्चों को दूध इसलिए ज्यादा पसंद होता है क्योंकि इससे उन्हें आराम और सुरक्षा का एहसास मिलता है। इसके अलावा, दूध का स्वाद भी उन्हें अच्छा लगता है और यह आसानी से पच जाता है। लेकिन दूध में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, जिससे बच्चे का पेट जल्दी भर जाता है और वह अन्य जरूरी भोजन कम खा पाता है।
इन्हीं कारणों से AAP सलाह देती है कि एक साल की उम्र के बाद बच्चों को प्रतिदिन लगभग 473 से 750 मिलीलीटर से अधिक दूध नहीं देना चाहिए।
दूध पर निर्भर होने के ये हैं लक्षण
दूध पर निर्भर होने के ये हैं लक्षण
दूध ही उसका पसंदीदा या लगभग एकमात्र भोजन है
वह दिन में बहुत ज्यादा दूध पीता है (लगभग 1 लीटर)
खाने के समय उसे भूख नहीं लगती
सॉलिड खाने में उसकी रुचि कम होती है
रात में भी दूध की मांग करता है
बोतल से दूध पीना पसंद करता है, कप से नहीं
दूध न मिलने पर रोना या नखरे करना
नोट- अगर ऐसे लक्षण दिखें, तो धीरे-धीरे दूध कम करके सॉलिड खाने की आदत बढ़ाना जरूरी होता है। Image-Istock
ज्यादा दूध पीने के बच्चे की सेहत पर नुकसान – 1- फल और साबुत अनाज से रहेगा दूर: बच्चा जितना लंबे समय तक सिर्फ दूध पीता रहेगा, उतना ही वक्त वह दूसरे सॉलिड खाने से दूर रहेगा। बस धीरे-धीरे वह सिर्फ नरम और मुलायम चीजें ही पसंद करने लगता है। इस वजह से फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य जरूरी और थोड़ा चबाने वाले फूड आइटम उसके लिए मुश्किल बनने लगते हैं, जबकि ये उसके शरीर और दिमाग विकास के लिए बेहद जरूरी होते हैं।
2- दांतों की सड़न का खतरा बढ़ता है: ज्यादा दूध पीने से दांतों में सड़न का खतरा बढ़ जाता है। जब दांत बार-बार दूध या जूस के संपर्क में रहते हैं, तो उनमें कैविटी हो सकती है। इनमें मौजूद प्राकृतिक शुगर बैक्टीरिया को बढ़ने में मदद करती है, जिससे दांत खराब होने लगते हैं।
हालांकि बच्चों के दूध के दांत बाद में गिर जाते हैं, लेकिन उनमें होने वाली कैविटी दर्द देती है और यह पूरी तरह से रोकी जा सकती है।
3: एनीमिया का का खतरा बढ़ता है: बच्चों में इस आदत की कमी की वजह से आयरन की कमी हो सकती है और एनीमिया होने का खतरा बढ़ता है। दरअसल, गाय, बकरी और मां के दूध में आयरन की मात्रा कम होती है। बढ़ते बच्चों को सही मात्रा में आयरन की भरपूर मात्रा की बेहद जरूरत होती है, जो उन्हें दालें, लाल मांस, टोफू और पालक जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों से मिलता है।4- मोटापे का रिस्क बढ़ता है: जिन बच्चे दूध ज्यादा पसंद करते हैं, वे अक्सर जरूरत से ज्यादा दूध पी लेते हैं। दूध और फॉर्मूला में कैलोरी अधिक होती है, इसलिए सिर्फ दूध पर निर्भर रहने वाले बच्चों का वजन उन बच्चों की तुलना में तेजी से बढ़ सकता है जो अलग-अलग तरह का भोजन खाते हैं।5- हेल्दी हैबिट नहीं पाएंगी विकसित: अगर बच्चा छोटी उम्र से ही केवल पसंदीदा और ज्यादा कैलोरी वाले फूड आइटम्स की आदत डाल लेता है, तो आगे चलकर उसकी खाने की आदतें असंतुलित हो सकती हैं और इसका असर उसके स्वास्थ्य पर वयस्क होने तक पड़ सकता है।
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