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AI को मिलेगी परमाणु शक्ति? वैज्ञानिकों ने किया अनोखा प्रयोग, जानें क्या है भविष्य का प्लान


AI को चलाने में लगने वाली पावर को देख दुनिया सोचने पर मजबूर है कि इसे चलाने के लिए बिजली कहां से आएगी? इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश यूटा यूनिवर्सिटी ने एक प्रयोग के जरिए की है। दरअसल वे अपने 50 साल पुराने TRIGA परमाणु रिएक्टर का इस्तेमाल पहली बार बिजली पैदा करने के लिए करेंगे। यह बिजली किसी शहर को नहीं, बल्कि एक छोटे AI डेटा सेंटर को चलाएगी।
इससे साफ होगा कि क्या परमाणु ऊर्जा से निकली गर्मी को सीधे कंप्यूटर की ताकत में बदला जा सकता है? ऐसे में देखा जाए, तो यह AI और परमाणु शक्ति के मिलन की शुरुआत हो सकती है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम? – रिपोर्ट के मुताबिक एक आम परमाणु रिएक्टर अपनी गर्मी को ठंडा करके बर्बाद कर देता है। अपने प्रयोग में वैज्ञानिकों ने इस गर्मी को बिजली में बदलने की कोशिश की है। इसके लिए ब्रेयटन साइकिल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें पानी से भाप बनाने की जगह, हीलियम गैस का इस्तेमाल किया जाता है, जो टरबाइन घुमाकर बिजली पैदा करती है।
यह पूरा सिस्टम एक आम भाप टरबाइन के मुकाबले बहुत छोटा होता है। फिलहाल, यह सिस्टम 2 से 3 किलोवाट बिजली पैदा करेगा, जो एक हाई-परफॉर्मेंस GPU यानी कि AI के दिमाग को चलाने के लिए काफी है।(REF.)
माइक्रो-रिएक्टर की तैयारी? – यह कोई छोटा प्रयोग नहीं क्योंकि इस पर 12 विश्वविद्यालयों के छात्रों और शोधकर्ताओं का दल काम कर रहा है। एलिमेंटल न्यूक्लियर एनर्जी इस प्रोजेक्ट को एक ग्लोबल नेटवर्क की तरह देखती है। उनका मानना है कि दुनिया भर में मौजूद TRIGA रिएक्टरों का इस्तेमाल करके हम अगली पीढ़ी की न्यूक्लियर तकनीक को तेजी से विकसित कर सकते हैं।
इस प्रयोग से मिलने वाला डेटा उन्हें डेटा इक्ट्ठा करने और सिस्टम को सुरक्षित बनाने में मदद करेगा। कंपनी का मकसद 2030-2031 तक काम करने वाले माइक्रो-रिएक्टर बनाना है, जो उद्योगों और डेटा सेंटरों को भरोसेमंद और कार्बन-मुक्त बिजली दे सकें।
डेटा सेंटरों में ही लगेंगे परमाणु रिएक्टर – यह प्रयोग इसलिए जरूरी है क्योंकि भविष्य में डेटा प्रोसेसिंग की जरूरतें बढ़ने के साथ बिजली की जरूरत भी बढ़ेगी। फिलहाल इसके लिए दुनिया बड़े ग्रिड पर निर्भर करती है। हालांकि भविष्य में छोटे न्यूक्लियर रिएक्टर सीधे डेटा सेंटर लगाए जा सकेंगे। इससे स्पलाई की चिंता के बिना लगातार बिजली मिल सकेगी।
परमाणु ऊर्जा को लेकर जो सुरक्षा की चिंताएं थीं, उन्हें ये छोटे, सुरक्षित और बंद-लूप वाले रिएक्टर खत्म कर सकते हैं।