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टीनएज उम्र में अपनी इस एक खूबी के कारण, लड़कियों को हो जाता है डिप्रेशन


टीनएज एक ऐसी उम्र है जिसमें बच्‍चे खुद अपनी इच्‍छाओं, जरूरतों और व्‍यवहार को ठीक तरह से समझ नहीं पाते हैं। यह उम्र जिंदगी का एक नया पड़ाव होता है, जो कई मुश्‍किलों और चुनौतियों से भरा होता है।
किसी को पढ़ाई की टेंशन होती है तो किसी को दिल टूट जाने का दर्द होता है। इस उम्र में बच्‍चों पर कई तरह का स्‍ट्रेस भी रहता है जो कभी-कभी डिप्रेशन का रूप भी ले सकता है। यदि डिप्रेशन का इलाज न किया तो दुनिया में मृत्‍यु का यह तीसरा सबसे बड़ा कारण है।
14 साल के बाद से बच्‍चों में डिप्रेशन हो सकता है और टीनएज उम्र खत्‍म होने तक 20 पर्सेंट बच्‍चों में क्‍लीनिकल डिप्रेशन होता है। चूंकि, इमोशनली लड़कियां जल्‍दी मैच्‍योर हो जाती हैं और लड़कों की तुलना में इनमें डिप्रेशन होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। किशोरावस्‍था के मध्‍य तक इनमें डिप्रेशन के साथ कोई मूड विकार हो जाता है।
इसलिए लड़कों की तुलना में टीनएज लड़कियों में डिप्रेशन का खतरा ज्‍यादा रहता है।
क्‍यों होता है लड़कियों को डिप्रेशन : बचपन में किसी तरह के शारीरिक शोषण या पेरेंट्स के तलाक, टीनएज उम्र में ब्रेकअप या किसी करीबी की मौत की वजह से डिप्रेशन हो सकता है। जब दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स असामान्‍य हो जाते हैं, तब नर्व रिसेप्‍टर और नर्व सिस्‍टम का कार्य बदल जाता है जिससे डिप्रेशन पैदा होता है।
वहीं पीरियड्स शुरू होने से पहले आने वाले बदलावों जैसे कि ब्रेस्‍ट में दर्द, पेट फूलने, सिरदर्द के कारण भी लड़कियों में प्रीमैंस्‍ट्रयुल डिस्‍फोरिक डिसऑर्डर देखा जाता है। इन लक्षणों से डिप्रेशन भी ट्रिगर होता है।
​लड़कियों में डिप्रेशन के लक्षण : व्‍यवहार में चिड़चिड़ापन, बहुत ज्‍यादा रोना, हमेशा दुखी रहना, कभी भी चिढ़ जाना, पहले कोई काम पसंद आना लेकिन अब उसमें रूचि कम हो जाना, भूख में बदलाव आना, वजन कम होना या बढ़ना, रात को देर तक जागना, बहुत ज्‍यादा या कम सोना, सुबह उठने में दिक्‍कत होना, आत्‍मविश्‍वास में कमी होना, पढ़ाई में फेल होना, बार-बार स्‍कूल से छुट्टी लेना डिप्रेशन का संकेत हो सकता है।
यदि बच्‍चे में यह लक्षण दो सप्‍ताह से ज्‍यादा समय तक दिख रहे हैं, तो आपको अपने बच्‍चे को डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए।
लगभग 80 पर्सेंट टीनएज बच्‍चों को डिप्रेशन की ट्रीटमेंट नहीं मिल पाती है और अगर इसका इलाज न किया जाए तो बच्‍चा पढ़ाई में फेल हो सकता है, भोजन संबंधी विकार और आत्‍महत्‍या की प्रवृत्ति हो सकती है।
​पेरेंट्स क्‍या करें : बच्‍चों को डिप्रेशन या किसी और मुसीबत से बचाने में पेरेंट्स सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। यहां हम पेरेंट्स के लिए अपने डिप्रेस बच्‍चे को सपोर्ट करने के लिए कुछ टिप्‍स बता रहे हैं।
बच्‍चे को लेक्‍चर देने की बजाय उसकी बात को सुनें। उसकी आलोचना न करें।
अगर बच्‍चा आप पर चिल्‍लाता है या आपसे बात करने से इनकार कर देता है, तो हार न मानें। टीनएज बच्‍चों के लिए डिप्रेशन के बारे में बात करना मुश्किल होता है इसलिए आपको ही धैर्य से काम लेना होगा।
अगर आपको बच्‍चे की बात बेमतलब या बचकानी भी लग रही है, तो उसके सामने इसे जाहिर न करें। उसे कुछ बुरा न कहें बल्कि समझाने और आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।
बच्‍चे को उसके दोस्‍तों से मिलने और बात करने दें। अगर फिर भी कोई सुधार नहीं दिखता है, तो किसी प्रोफेशनल की मदद लें।

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