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सीने से तकिया लगाकर सोने की है आदत? जानिए ये आपके व्यक्तित्व के बारे में क्या बताता है

हर शख्स की सोने की आदतें अलग होती है। कोई पीठ के बल सोना पसंद करता है, तो किसी को करवट लेकर सोना अच्छा लगता है। हालांकि, जिस तरह से व्यक्ति के बोलचाल, चलने, बैठने, चेहरे के भाव आदि से उसके व्यक्तित्व का पता चलता है, वैसे ही सोने की आदतें भी व्यक्ति के बारे में काफी कुछ कहती हैं। इसे लेकर यूं तो कई स्टडीज हुई हैं, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष निकला नहीं है। हालांकि, ये मानने में कोई बुराई नहीं कि इनसे एक अंदाजा तो मिल ही जाता है, जो व्यक्ति को खुद को या दूसरे को समझने में मदद कर सकता है।
सोने की ऐसी ही एक आदत में तकिया गले या सीने से लगाकर सोना भी शुमार है। ये बेहद आम आदतों में से एक है। इसे न सिर्फ बच्चों को करते देखा जाता है, बल्कि बड़े तक तकिए को हग करके सोते दिखाई देते हैं। इसके पीछे यूं तो कई वजह होती हैं, जिनमें व्यक्ति का कम्फर्ट और आराम महसूस करना आम है। हालांकि, यही चीज व्यक्तित्व के बारे में कुछ और भी हिंट देती दिखाई देती है। इसका रिश्ता उस पक्ष से भी जुड़ा है, जो व्यक्ति के रिलेशनशिप्स को हैंडल करने की झलक को दिखाता है। (सभी सांकेतिक तस्वीरें: pexels)
रिश्तों को तवज्जो देने वाला : अगर आप तकिया सीने से लगाकर सोते हैं, तो ये दिखाता है कि आप स्नेही व्यक्ति हैं। ‘हगिंग पिलो स्लीपिंग साइकलॉजी’ के मुताबिक, ऐसा करने वाले लोग अपनी जिंदगी में रिश्तों को सबसे ऊपर रखते हैं। चाहे उनके रिश्तेदार हों, दोस्त, परिवार या फिर जीवनसाथी और बच्चे, उनके लिए ये रिलेशनशिप्स सब चीजों से बढ़कर होती हैं।
शर्मीला स्वभाव : इसी ब्लॉग में ‘पिलो हगर’ व्यक्ति के बारे में और भी बातें लिखी गई हैं। इसके अनुसार तकिये को गले लगाकर सोने वाले लोग शर्मीले स्वभाव के होते हैं और वे घुलने-मिलने में समय लगाते हैं। उनके लिए किसी को अप्रोच करना आसान नहीं होता है। भावनाएं साझा करना भी उनके लिए मुश्किल होता है। ये चीज इसी में दिखती है कि वे व्यक्ति से ज्यादा तकिए को गले लगाने में सहज महसूस करते हैं।
ये भी है फायदा : ‘द बेनेफिट्स ऑफ कडलिंग विद इनएनिमेट ऑबजेक्ट्स एट नाइट’ में फ्लोरिडा बेस्ड क्लीनिकल साइकलॉजिस्ट स्टेफनी सिल्बरमैन ने बताया कि पिलो हग करके सोना कई तरह से फायदा भी पहुंचाता है। साइकलॉजिकली ये व्यक्ति को ‘सेंस ऑफ सेफ्टी और सिक्यॉरिटी’ देता है। इससे व्यक्ति को अपनी ऐंग्जाइटी व स्ट्रेस को कम कर रिलैक्स्ड महसूस करने व सोने में मदद मिलती है।
इसमें कुछ गलत नहीं : सिल्बरमैन के मुताबिक, ये आदत बचपन से ही हमारे साथ बनी रहती है। मां की कोख से बाहर आने के बाद थोड़े बड़े होने तक भी बच्चे को फीटल पोजिशन में सोने से सुकून महसूस होता है। इस वजह से वे सोते वक्त सॉफ्ट टॉय या फिर ब्लैंकेट को गले लगाकर रखते हैं। ये अहसास बड़े होने तक बना रहता है। ऐसे में बड़े होकर भी इस पोजिशन में सोने में कुछ गलत नहीं है।

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