
नेपाल की तरह पाकिस्तान भी भारत-चीन सीमा विवाद का फायदा उठाने की फिराक में है। भारत के साथ चीन की हिंसक झड़प के बाद पाकिस्तान ने भी अपने अपने खास दोस्त चीन की मदद के लिए साजिशें शुरू कर दी हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI के मुख्यालय में करीब 2 साल बाद तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने अहम बैठक की खबर सामने आई। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के जरिए पाकिस्तानी सेना ने अपने नापाक इरादे भारत को बताने की कोशिश की है।
पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी बयान में तीनों सेनाओं के प्रमुखों के बीच हुई इस बैठक में नियंत्रण रेखा और कश्मीर के हालात पर चर्चा हुई। इस बैठक में पाकिस्तानी सेना के प्रमुख कमर जावेद बाजवा, नेवी चीफ जफर महमूद अब्बासी और वायुसेना प्रमुख मार्शल मुजाहिद अनवर खान शामिल थे। इसके अलावा पाकिस्तानी की सेना और आईएसआई के कई आला अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा पर ब्रीफिंग के लिए आईएसआई के मुख्यालय में तीनों सेनाओं के प्रमुखों का जुटना अपने आप में दुर्लभ घटना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों सेनाओं के प्रमुख आमतौर पर जॉइंट चीफ ऑफ स्टॉफ की कमिटी में मिलते हैं जिसकी बैठक जुलाई 2018 में हुई थी। इस तरह की बैठक केवल संकट के समय में ही होती हैं।
इससे पहले आईएसआई दो बार पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को सुरक्षा के ताजा हालात बता चुकी है। डॉन ने कहा कि यह बैठक बेहद अहम है जो भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच हुई है। पाकिस्तान को यह डर सता रहा है कि भारत उस पर हमला कर सकता है। उधर, पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक का उद्देश्य भारत को रणनीतिक संकेत देना है। डॉन ने बताया कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी आने वाले कुछ दिनों में अपने चीनी समकक्ष वांग यी से इस बारे में बात कर सकते हैं।
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