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सऊदी अरब में न हो MBS का तख्‍तापलट, इसलिए पहुंची पाकिस्‍तानी-तुर्की की सेना, ईरानी एक्‍सपर्ट ने खोली पोल


ईरान के एक प्रमुख ईरानी-अमेरिकी शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक सैयद मोहम्मद मरांडी ने सऊदी अरब में पाकिस्तान और तुर्की की सेनाओं की तैनाती पर बड़ा दावा किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी अरब में अपनी सेना इसलिए तैनात की है, ताकि मोहम्मद बिन सलमान का तख्तापलट न हो और उनकी सरकार बची रहे। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान और तुर्की कभी भी खुद युद्ध में शामिल होना नहीं चाहते हैं। उन्होंने इन तीनों देशों को अमेरिकी खेमे का करार दिया और कहा कि इनके पास कदम उठाने या पैंतरेबाजी करने की गुंजाइश बेहद कम है।
‘प्रिंस सलमान के लिए पाक-तुर्की ने सऊदी में सेना भेजी’ – उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, “अभी हमें यही सुनने को मिल रहा है। लेकिन आगे चलकर वे युद्ध में हिस्सा लेंगे या नहीं, यह देखना बाकी है। मुझे जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार वे वहां मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा के लिए हैं—चाहे कबीले विद्रोह कर दें, शाही परिवार बगावत कर दे, या फिर इन बेहद कठिन हालात में आम नागरिक (सिविल सोसाइटी) ही विद्रोह कर बैठें। देखते हैं क्या होता है।”
मेरी समझ से, तुर्की और पाकिस्तान असल में खुद युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते। वे मुख्य रूप से वहां मोहम्मद बिन सलमान की सुरक्षा के लिए मौजूद हैं, ताकि अगर कोई आंतरिक कलह होती है, तो उनकी रक्षा की जा सके। सैयद मोहम्मद मरांडी, ईरान के राजनीतिक विश्लेषक
सऊदी, पाकिस्तान, तुर्की को अमेरिका समर्थक बताया – सैयद मोहम्मद मरांडी ने आगे कहा, “तेहरान में हुई बैठक कोई बुरी बात नहीं थी, लेकिन इससे कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इस बैठक से ऐसा कोई समझौता सामने नहीं आया जिससे ज़मीनी हालात में कोई बदलाव आ सके। बंद दरवाजों के पीछे, ये तीनों सरकारें इजरायली शासन के प्रति काफी आक्रामक थीं। वे ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जिसका इस्तेमाल वे सार्वजनिक रूप से नहीं करते। लेकिन मेरा मानना ​​है कि ये तीनों सरकारें अमेरिकी खेमे में हैं। वे ईरान की तरह नहीं हैं। वे ईरान की तरह स्वतंत्र नहीं हैं। इसलिए, उनके पास कदम उठाने या पैंतरेबाजी करने की गुंजाइश बहुत सीमित है।”