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‘तालिबान शासन’ बनाम ‘सैन्य शासन’, मॉस्को बैठक में एक दूसरे पर आग उगलते रहे पाकिस्तान और तालिबान के अधिकारी


अफगानिस्तान को लेकर रूस की राजधानी मॉस्को में आयोजित ‘मॉस्को फॉर्मेट’ की आठवीं बैठक बिना किसी संयुक्त बयान के खत्म हो गई है। इस दौरान पाकिस्तान और तालिबान के अधिकारियों के बीच भारी तनाव देखने को मिला और दोनों एक दूसरे को कोसते नजर आए। सीमा पार आतंकवाद समेत कई मुद्दों पर दोनों के बीच भारी विवाद हुआ। दोनों ने एक दूसरे पर आतंकी समूहों का समर्थन करने के आरोप लगाए।
मॉस्को में हुई बैठक के दौरान पाकिस्तान ने अफगान अधिकारियों को ‘तालिबान शासन’ कहना शुरू कर दिया जिसके बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी ने पाकिस्तानी सरकार को ‘सैन्य शासन’ कहा। इसके अलावा तालिबान ने पाकिस्तान पर दाएश यानि ISIS का समर्थन करने का भी आरोप लगाया। तालिबान ने दो दिन पहले दो दर्जन से ज्यादा आईएसआईस आतंकियों को मारने का दावा किया है और कहा कि इन आतंकियों को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाने भेजा था।
पाकिस्तान ने तालिबान पर लगाया आतंकियों का साथ देने का आरोप – बैठक के दौरान पाकिस्तानी अधिकारियों ने तालिबान पर अफगानिस्तान में आतंकी समूहों का समर्थन करने का आरोप लगाया। पाकिस्तान का आरोप था कि अफगानिस्तान की जमीन से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM), इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (ISKP) और अल-कायदा ऑपरेट हो रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान के आरोपों से तालिबान के अधिकारी बौखला गये और इसके बाद ही बातचीत नाकाम होने की दिशा में आगे बढ़ गई। आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई।