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फैशन के चक्कर में शरीर पर पड़ सकता है दबाव! High Heels कैसे प्रभावित करती हैं हिप्स और स्पाइन


High Heels पहनना फैशन का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका असर केवल पैरों तक सीमित नहीं रहता। ऊंची एड़ी पहनने से शरीर का बैलेंस, चाल, पोश्चर और मांसपेशियों की गतिविधि बदल सकती है। कुछ लोगों में लंबे समय तक हील्स पहनने से पीठ के निचले हिस्से, घुटनों में असहजता, कूल्हों पर अतिरिक्त दबाव और टखने में चोट का जोखिम बढ़ सकता है। High Heels और Musculoskeletal Pain के बीच संबंध पाया गया है, हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है।
हाई हील्स से कूल्हों और स्पाइन में क्या प्रभाव पड़ता है? (Designed By Magnific) – ऊंची एड़ी यानी हाई हील्स पहनना कई लोगों के लिए फैशन और आत्मविश्वास से जुड़ा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन जूतों में चलते समय आपके शरीर को अपना बैलेंस बनाए रखने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है? हाई हील्स पैरों के नीचे दबाव का वितरण बदल सकती हैं और चलने के तरीके, मांसपेशियों की सक्रियता तथा घुटनों और टखनों की मूवमेंट को भी प्रभावित कर सकती हैं। कुछ लोगों को लंबे समय तक हील्स पहनने के बाद कमर, कूल्हों या पैरों में दर्द भी महसूस हो सकता है।
हाई हील्स पहनने पर शरीर का बैलेंस कैसे बदलता है? – जब आप हाई हिल्स पहनती हैं, तो पैर की स्थिति बदल जाती है और शरीर का वजन सामान्य फ्लैट जूतों की तुलना में अलग तरीके से वितरित होने लगता है। खासकर ऊंची और पतली हील्स में जमीन के साथ संपर्क का क्षेत्र कम हो सकता है। ऐसे में शरीर को स्थिर रखने के लिए मांसपेशियों और जोड़ों को लगातार छोटे-छोटे बदलाव करने पड़ते हैं। चलते समय पैर का जमीन पर पड़ने का तरीका, कदमों की लंबाई और शरीर का संतुलन प्रभावित हो सकता है। असमान सतह, सीढ़ियों या फिसलन वाली जगह पर यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है। इसलिए ऊंची हील्स पहनकर चलते समय टखने मुड़ने या गिरने का जोखिम भी बढ़ सकता है।
हाई हील्स से कूल्हों और स्पाइन में क्या प्रभाव पड़ता है? (Designed By Magnific) – एनसीबीआई के अनुसार हाई हील्स पहनने पर एड़ी ऊपर उठ जाती है, जिससे पैर और टखने की स्थिति बदलती है। इस बदलाव के साथ शरीर अपना संतुलन बनाए रखने के लिए घुटनों, कूल्हों और धड़ की पोजीशन में भी बदलाव कर सकता है। इस प्रक्रिया को Postural Adjustment कहा जाता है। जबकि कुछ लोगों में कमर के निचले हिस्से का घुमाव यानी लुमबर लॉर्डोसिस बदल सकता है, लेकिन यह बदलाव हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। शरीर की बनावट, मांसपेशियों की ताकत, हील्स की ऊंचाई और उन्हें कितनी देर पहना जाता है—इन सभी का प्रभाव पड़ सकता है।
हाई हील्स से पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है? – लंबे समय तक हाई हील्स पहनने पर कमर के निचले हिस्से में खिंचाव या दर्द महसूस हो सकता है। इसकी एक संभावित वजह शरीर के पॉश्चर और चलने के तरीके में बदलाव है। जब पैर की स्थिति बदलती है, तो शरीर को संतुलित रखने के लिए पीठ और पेट की मांसपेशियों को अलग तरीके से काम करना पड़ सकता है। लंबे समय तक खड़े रहने या चलने से कुछ लोगों में थकान और असहजता बढ़ सकती है। रिसर्च गेट के अनुसार उन्होंने एक स्टडी में पाया कि कि जो छात्राएं 2 या उससे अधिक वर्षों तक ऊंची एड़ी के जूते पहनती हैं, उन्हें कमर में थोड़ा दर्द होता है और एड़ी की ऊंचाई बढ़ने के साथ-साथ दर्द की तीव्रता भी बढ़ जाती है।
हाई हील्स से कूल्हों और स्पाइन में क्या प्रभाव पड़ता है? (Designed By Magnific) – हाई हील्स पहनने से शरीर का वजन संभालने और चलने का तरीका बदल सकता है। इस बदलाव के कारण कूल्हों यानी हिप्स के आसपास की मांसपेशियों को शरीर को स्थिर रखने के लिए अलग तरीके से काम करना पड़ सकता है। लंबे समय तक हील्स पहनने या उनमें अधिक चलने पर कुछ लोगों को कूल्हों, जांघों या कमर के आसपास थकान और असहजता महसूस हो सकती है। साइंस डायरेक्ट के अनुसार पता चलता है कि ऊंची एड़ी के जूते पहनने से धड़ और कूल्हे की मांसपेशियों के समन्वय के पैटर्न में बदलाव आ सकता है। साथ ही इससे कूल्हे में दर्द महसूस हो सकता है।
हाई हील्स केवल पैरों की स्थिति नहीं बदलतीं, बल्कि शरीर के बैलेंस और मांसपेशियों के काम करने के तरीके को भी प्रभावित कर सकती हैं। इनके इस्तेमाल से कुछ लोगों में कमर, घुटनों, कूल्हों और टखनों में असहजता या चोट का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति पर असर एक जैसा नहीं होता। हील्स पहनना पसंद है, तो सही फिट, स्थिर डिजाइन और पहनने की अवधि पर ध्यान दें। लगातार दर्द होने पर उसे केवल जूतों की वजह मानकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।