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पिता के बिना क्‍यों अधूरी है बेटियों की परवरिश


बेटियां जहां मां की सहेली होती हैं, वहीं पिता की सबसे ज्‍यादा लाडली होती हैं। एक बेटी की परवरिश में पिता की बहुत अहम भूमिका होती है।
इस दुनिया में आने के बाद लड़कियां सबसे पहले किसी पुरुष को जानती हैं तो वो है उनका पिता। फादर बहुत खास होते हैं और बिना कोई शिकायत किए अपनी बेटी की हर डिमांड को पूरा करते हैं।
वहीं, बेटी की विदाई में अगर कोई सबसे ज्‍यादा रोता है तो वो भी पिता ही होते हैं। आखिर एक पिता का अपनी बेटी से इतना खास रिश्‍ता क्‍यों होता है?
जिंदगी में पहले पुरुष होते है
लड़कियों की जिंदगी में उनके पिता ही पहले पुरुष होते हैं। वो क्‍या करते हैं, कैसे करते हैं, बेटियों के प्रति उनका व्‍यवहार और हर छोटी चीज का असर बे‍टियों पर पड़ता है। पिता अपनी बेटियों के लिए पुरुष के रूप का एक आईना होते हैं। वह जो भी करते हैं बेटियों को वो अच्‍छा ही लगता है।
बचपन से ही बेटों को महिलाओं का आदर और सम्‍मान करना सिखाएं। बहन, मां और घर की अन्‍य महिलाओं का आदर करना सिखा कर आप इसकी शुरुआत कर सकते हैं।
इसके बाद उसे हर इंसान से सम्‍मानपूर्वक बात करने की सीख दें। घर का नौकर हो या बाहर का कोई व्‍यक्‍ति, उसे हर किसी से आदर से बात करने के लिए कहें।
इससे समाज में बच्‍चे का आदर बढ़ेगा। आज के समय में पुरुषों में ये गुण होना बहुत जरूरी है और इसकी नींव आप बचपन से ही रखें तो बेहतर होगा।

लड़कों को बचपन से ही घर में ये बोला जाता है कि लड़के रोते नहीं हैं। ऐसा कह कर उन्‍हें अंदर से मजबूत बनाने की कोशिश की जाती है। लेकिन सच बात तो यह है कि हर इंसान अपना दुख और तकलीफ व्‍यक्‍त कर सकता है, फिर चाहे वो लड़के ही क्‍यों न हों।

रोने से मन हल्‍का हो जाता है और दिल की तकलीफ भी कम होती है, इसलिए कभी भी अपने बेटों से ये न कहें कि लड़कों को रोना नहीं चाहिए।

बच्‍चों को अपनी सोच और निर्णयों के लिए निडर और मजबूत बनाना चाहिए। उसे डरने की बजाय चुनौतियों से लड़ने की ताकत देनी चाहिए। जीवनभर उसके रास्‍ते में कई मुश्किलें आएंगीं इसलिए बचपन से ही उसे मुश्किलों से लड़ी सिखाएं।

बच्‍चों के लिए सब कुछ खुद करके न दें बल्कि उसे अपना रास्‍ता खुद बनाने दें। जब कोई अपने सपनों या अपनी बात के लिए लड़ना नहीं सीखता, तो उस इंसान के लिए खुश रहना बहुत मुश्किल हो जाता है।
अपने बेटे को जीवन में कोई लक्ष्‍य बनाने और उसे पाने के लिए प्रेरित करें। उसे बताएं कि लाइफ में क्‍या जरूरी है और क्‍या नहीं। उसे बताएं कि सपनों को पाने के लिए किए गए प्रयास दिल को कितनी खुशी देते हैं।

बच्‍चे को अपने सपनों के पीछे भागना और उसे पाने के लिए भरसक कोशिशें करना सिखाएं और मोटिवेट करें।
समाज में एक अच्‍छा माहौल बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है कि लड़के लड़कियों को खुद के बराबर समझें। उन्‍हें बचपन से ही ये सीख दें कि हर पहलू और क्षेत्र में लड़का-लड़की एक बराबर होते हैं।
उसे बताएं कि पति और पिता के रूप में कैसे उसे अपनी जिम्‍मेदारियों को पूरा करना है और अपने जीवन में अपनी पत्‍नी को बराबर का भागीदार समझना है।
बेटियों को करते हैं प्रोटेक्‍ट
मां की तरह पिता भी अपनी बेटियों को बेइंतहा प्‍यार करते हैं। एक पिता अपनी बेटी को जितना प्रोटेक्‍ट करता है, उतना शायद ही कोई करता होगा। जब हमारे साथ डैड हों तो कोई हमारी तरफ आंख उठाकर भी नहीं देख सकता है।

पति के लिए बनते हैं रोल मॉडल
कहा जाता है कि हर लड़की अपने पिता जैसी खूबियों को अपने पति में ढूंढती है और चाहती है कि उसका पति उसके डैड की तरह ही उसे प्‍यार करे और उसके नखरे उठाए। पिता का प्‍यार देखकर लड़कियों के मन में ये बात गहरी छाप छोड़ जाती है कि उनका पति भी उन्‍हें इसी तरह प्‍यार और सपोर्ट करे।
इतना ही नहीं, जिन लड़कियों की अपने पिता के साथ गहरी दोस्‍ती होती है उनका अपने आसपास के लोगों और दोस्‍तों के साथ भी अच्‍छा व्‍यवहार होता है।
अपने एक इंटरव्‍यू में सनी ने इस बात को कबूल किया था कि वो चाहती हैं कि निशा को पता चले कि उसकी बायोलॉजिकल मां ने उसे नौ महीने पेट में रखा और वह उसे छोड़ना नहीं चाहती थी।
गोद लेने के बाद सनी ही उसकी मां हैं और वो अपने से उसे दूर जाने नहीं देना चाहती हैं। सनी की इस बात से साफ पता चलता है कि वो अपनी बेटी से कुछ छिपाना नहीं चाहती हैं।
सनी कहती हैं कि निशा को गोद लेने के बाद वो और उनके पति डेनियल अपनी बेटी के सारे काम खुद करते थे। उसे नहलाना, नैपी बदलना और खाना खिलाना, सारे काम दोनों मिलकर करते हैं।
उसके उठने पर हम दोनों भी उठ जाते हैं। सुबह होते ही हम दोनों उसके कमरे में उसे गुड मॉर्निंग विश करने के लिए भागते हैं। निशा के आने के बाद हम दोनों बहुत खुश हैं।
भले ही सनी ने निशा को गोद लिया हो और वो उसकी असली मां न हों, लेकिन फिर भी जिस तरह से सनी अपनी बेटी की परवरिश कर रही हैं, उसे देखकर कोई नहीं कह सकता कि वो उसकी असली मां नहीं हैं।
बच्‍चा चाहे अपना हो या एडॉप्‍टिड, उसे प्‍यार और देखभाल की जरूरत होती है इसलिए आप भी अपने बच्‍चे को खूब प्‍यार दें ताकि उसका बचपन और आगे की जिंदगी संवर सके।
मां के गुस्‍से से बचाते हैं
कोई गलती करने पर आपने भी मां की डांट सुनी ही होगी और ऐसे में मां की गुस्‍से से भरी निगाहों से अगर कोई बचा सकता है, तो वो हैं आपके पिता। मां के गुस्‍से को शांत करने की हिम्‍मत भी डैड में ही होती है।
हमेशा रहती हैं प्रिंसेस
बेटियां अपने पिता के लिए हमेशा प्रिंसेस ही होती हैं। आप चाहे कितनी भी बड़ी हो जाएं, लेकिन अपने डैड के लिए आप हमेशा उनकी लिटिल गर्ल ही रहेंगी, जिसके नखरे वो पूरी जिंदगी उठा सकते हैं। पिता के लिए बेटियां लाडली ही रहती हैं।

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