
अजरबैजान ने आर्मीनिया पर तुर्की के प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन PKK के हजारों आतंकवादियों की मदद लेने का आरोप लगाया है। अजरबैजान के भारत में राजदूत एल्चिन अमीरबयोव ने एनबीटी ऑनलाइन से विशेष बातचीत में कहा कि हमें आर्मीनिया से निपटने के लिए पाकिस्तान या सीरियाई आतंकवादियों की जरूरत नहीं है। अमीरबयोव ने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब अजरबैजान पर नगोर्नो-काराबाख की जंग में तुर्की समर्थित सीरियाई आतंकवादियों के इस्तेमाल का आरोप लग रहा है।
अमीरबयोव ने कहा कि हमें खुफिया सूत्रों से बहुत पक्की जानकारी मिली है कि आर्मीनिया ने तुर्की के प्रतिबंधित गुट पीकेके के हजारों आतंकवादियों को अगस्त महीने में बुलाया था। इन्हें पश्चिम एशिया से आर्मीनिया बुलाया गया था ताकि अजरबैजान से युद्ध किया जा सके। उन्होंने कहा कि तुर्की ने अपने लड़ाकू विमानों को नहीं भेजा है। तुर्की केवल राजनयिक और राजनीतिक समर्थन दे रहा है। तुर्की हमारा स्वाभाविक सहयोगी है।
‘आर्मीनिया अजरबैजान को अलग-थलग करना चाहता है’
उन्होंने कहा कि आर्मीनिया अजरबैजान को अलग-थलग करना चाहता है। उसका रूस के साथ सैन्य गठबंधन है और अन्य देशों को वह अपने साथ लाने में लगा है। तुर्की के हमारे साथ आने से इलाके में स्थिरता आई है। अगर आर्मीनिया अपने साथ रूस को लाने में कामयाब हो जाता है तो यह अजरबैजान की स्वतंत्रता को खत्म कर देगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यह अच्छी तरह से जानता है कि स्वतंत्रता का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि हमने भारत को इस पूरी घटना के बारे में पूरी जानकारी दी है। पूरा इंटरव्यू देखें…..
‘मानवीय संघर्ष विराम की शर्तों पर बातचीत जारी’
राजदूत एल्चिन अमीरबयोव ने कहा कि अजरबैजान और आर्मीनिया के विदेश मंत्री कई घंटे तक साथ बैठे हैं और मानवीय संघर्ष विराम की शर्तों पर बातचीत की है। इससे पहले तीन बार युद्ध विराम हुआ था लेकिन उसके बाद आर्मीनिया के सैनिकों ने अजरबैजान के नागरिकों पर गोलाबारी शुरू कर दी, जिससे सीजफायर खत्म हो गया था। इस बार दोनों देशों के विदेश मंत्री अमेरिका, रूस, फ्रांस के साथ मिलकर बनाए गए MINSK समूह के सह अध्यक्ष के साथ मिलकर मानवीय संघर्ष विराम पर बात कर रहे हैं। इसके तहत दोनों देश युद्ध के दौरान मारे गए सैनिकों के शव को निकालने की अनुमति देंगे। साथ ही रेडक्रॉस को अनुमति देंगे और गिरफ्तार किए गए सैनिकों की संख्या को साझा करेंगे ताकि उनका आदान-प्रदान किया जा सके।
अब तक इस जंग में 5 हजार लोग मारे गए : अजरबैजान के राजदूत ने कहा कि कितने युद्धबंदी पकड़े गए हैं, यह सवाल बहुत ही मुश्किल है। हमने अभी तक ठोस आंकड़े नहीं जारी किए हैं। आप जो लोगों के मारे जाने की बात कर रहे हैं, वे भी अनुमान पर आधारित हैं। अभी संघर्ष जारी है, इसलिए हमारे लिए ठीक-ठीक आंकड़ा देना मुश्किल है। हमने मानवीय आधार पर यह प्रस्ताव दिया है कि आर्मीनिया के मारे गए सैनिकों की लाशों को सौंप दिया जाए। हमने 30 सैनिकों की लाशें आर्मीनिया को सौंपी हैं और एक युद्धबंदी महिला को वापस भेजा है। आर्मीनिया का पक्ष ऐसा नहीं कर रहा है। हमारे कई सैनिकों का शव आर्मीनिया के इलाके में है लेकिन वे लौटा नहीं रहे हैं। आर्मीनिया-अजरबैजान के बीच 27 सितंबर से संघर्ष शुरू हुआ है और रूस के राष्ट्रपति के मुताबिक अब तक इस जंग में 5 हजार लोग मारे गए हैं।
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