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तालिबान से लोहा लेने वाली 16 साल की कमर गुल ने अपने पति को ही उतारा मौत के घाट


अफगानिस्तान में जिस तालिबान पर नकेल कसने के लिए दुनिया की सुपरपावर तक परेशान है, 16 साल की कमर गुल ने उसको सबक सिखाकर मिसाल पेश की है। इस केस में अब एक और अहम जानकारी भी सामने आई है कि गुल ने जिन दो तालिबानियों को मार डाला था, उनमें से एक उसका पति था। पहले की रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि तालिबानी गांववालों से वसूली करने आए थे, जबकि दूसरों का कहना था कि गुल के पैरंट्स सरकार का समर्थन करते थे। इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया। हालांकि, रिश्तेदार और स्थानीय रिपोर्ट्स का कहना है कि गुल का पति उसे जबरदस्ती वापस ले जाने आया था।
मार डाले थे दो लड़ाके, कई घायल
आपको बता दें कि 17 जुलाई को रात एक बजे अफगानिस्तान के घोर प्रांत में पिछले हफ्ते ये तालिबान आतंकवादी गुल के घर में घुस गए उनके माता-पिता को मार डाला। इसके बाद कमर गुल बाहर निकलीं और AK-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी जिसमें दो लड़ाके मारे गए। अब पता चला है कि गुल के पिता शाह गुल रहीमी ने 2016 में गुल की शादी मोहम्मद नईम से की थी और उन्होंने खुद नईम की भतीजी से अपनी दूसरी शादी रचाई थी।
गुल को लेकर चले गए थे उसके पिता
हालांकि, बाद में नईम तालिबान से जाकर मिल गया। रिश्तेदारों और स्थानीय अधिकारियों को कहना है कि वह कर्ज में डूबा था और उसकी निजी जिंदगी में उथल-पुथल चल रही थी। गुल के साथ वक्त बिताने के लिए अपनी पहली पत्नी को नजरअंदाज करने पर नईम का अपने परिवार से झगड़ा हो गया था और उसने घर छोड़ दिया। दूसरी ओर रहीमी की दूसरी पत्नी जब अपना घर छोड़कर आ गई तो रहीमी गुल को अपने साथ लेकर चले गए और नईम से अपना सारा कर्ज चुकाने को कहा।
40 आतंकवादियों के हमले से नहीं डरीं कमर गुल
पाकिस्‍तान में तालिबान आतंकवादियों की गोली का शिकार होने के बावजूद पूरी बहादुरी से अपनी जिंदगी संवारने वाले मलाला यूसुफजई के बारे में तो आपने काफी कुछ सुना होगा। अब हम आपको बताते हैं कमर गुल की कहानी जिन्होंने न सिर्फ तालिबान का सामना किया बल्कि उसके तीन लड़ाकों को अपने पिता की AK-47 राइफल से भून डाला। तालिबान आतंकवादियों ने सरकार का समर्थन करने पर गुल के घर में घुसकर उनके माता-पिता को मार डाला था जिसका गुल ने पूरा इंतजकाम लिया। गांव पर 40 से अधिक आतंकवादियों ने हमला किया था।
तालिबान के साथ एक घंटे तक भीषण गोलीबारी
बताया जा रहा है कि 17 जुलाई को रात एक बजे अफगानिस्तान के घोर प्रांत में पिछले हफ्ते ये तालिबान आतंकवादी गुल के घर में घुस गए उनके माता-पिता को मार डाला। इसके बाद कमर गुल बाहर निकलीं और AK-47 से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। कमर गुल के साथ उनका भाई भी मौजूद था। करीब एक घंटे तक चली गोलीबारी में तीन आतंकवादी मारे गए। बाद में दूसरे लड़ाके भी गुल के घर आए लेकिन गांववालों की मदद से सरकार के समर्थकों ने गनफाइट के बाद उन्हें भगा दिया। अफगान सुरक्षाबल अब कमर गुल और उनके भाई को सुरक्षित स्थान पर लेकर चले गए हैं।
कमर गुल की बहादुरी को दुनिया का सलाम
कमर गुल के तालिबान को मुंहतोड़ जवाब देने की घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी बहादुरी को सलाम किया जा रहा है। इतनी कम उम्र में कमर गुल ने जिस हिम्‍मत से तालिबान का सामना किया, उसके लिए हर कोई उनके जज्बे को सलाम कर रहा है। इस घटना के बाद कमर गुल और उनके भाई दो दिनों तक बेहद सदमे में रहे और कुछ ज्‍यादा बातचीत नहीं की। इस जवाबी कार्रवाई पर कमर गुल ने कहा कि यह उनका अधिकार था, क्‍योंकि हमें अपने माता-पिता के बिना नहीं जीना है। गांव में उनके सौतेले भाई के अलावा और ज्‍यादा रिश्‍तेदार नहीं हैं। तालिबान आतंकवादी अक्सर ही अफगान सरकार और सुरक्षाबलों का समर्थन करने वाले लोगों को मार डालता है। हाल के महीनों में काबुल के साथ शांतिवार्ता के बावजूद तालिबान ने हमले तेज कर दिए हैं।
राष्‍ट्रपति गनी ने की तारीफ, आने का न्‍यौता दिया
अफगानिस्‍तान सरकार ने कैबिनेट की मीटिंग में कमर गुल के साहस की जोरदार प्रशंसा की है। राष्‍ट्रपति अशरफ गनी ने कमर गुल और उनके भाई को राष्‍ट्रपति भवन में आमंत्रित किया है। जिले के गवर्नर मोहम्‍मद रफीक आलम ने कहा, ‘जब मैंने उस रात दोनों को देखा तो वे सदमे में थे लेकिन सम्‍मानित महसूस कर रहे थे।’ कमर गुल की हाथों में AK-47 लिए तस्‍वीर अब सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की जा रही है। बता दें कि वर्ष 2001 में शुरू हुए संघर्ष में अब तक एक लाख अफगान लोग मारे जा चुके हैं।
कर्ज चुकाने की जगह हमला बोला
तब तक नईम की एक तालिबानी कमांडर के साथ नजदीकी बढ़ गए थी जिसने कर्ज चुकाने की जगह दर्जनों लड़ाके गुल के घर भेज दिए। 17 जुलाई की रात को गुल के पिता और मां को गोली मार दी गई। तब गुल ने अपने पिता की AK-47 से ओपन फायरिंग की और दो लड़ाकों को मार डाला जिनमें से एक नईम था।
‘आखिरी बार माता-पिता से बात नहीं कर सकी’
गुल अपने माता-पिता की हत्या का बदला लेकर खुश हैं। उनका कहना है, ‘मैंने उन्हें मारा क्योंकि उन्होंने मेरे माता-पिता को मारा और मुझे पता था कि वे मेरे और मेरे भाई को लिए वापस आएंगे।’ हालांकि, उन्हें इस बात का गम है कि वह अपने माता-पिता से आखिरी बार मिल नहीं सकीं। उन्होंने बताया, ‘जब मैंने दो तालिबानियों को मार दिया और फिर अपने पैरंट्स के पास गई तो वे सांस नहीं ले रहे थे। मुझे गम है कि मैं आखिरी बार उनसे बात नहीं कर सकी।’ घोर प्रांत के गवर्नर के प्रवक्ता आरिफ अबेर ने गुल और उनके भाई हबीबुल्ला को तालिबान के खिलाफ लड़ाई में आज के जमाने का चैंपियन बताया है।