
न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आज ही के दिन 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकी हमले को 18 साल हो गए हैं। उस हमले की टीस और जख्म आज भी लोगों के जेहन में है। इन 18 सालों में भले ही अब वहां सबकुछ बदल चुका है लेकिन वो भयानक लम्हा लोगों को नहीं भूलता। 11 सितंबर 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका पर अल-क़ायदा द्वारा समन्वित आत्मघाती हमलों की श्रृंखला थी। उस दिन सुबह 19 अल कायदा आतंकवादियों ने चार वाणिज्यिक यात्री जेट एयरलाइनर्स का अपहरण कर लिया था। अपहरणकर्त्ताओं ने जानबूझकर उनमें से दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, न्यूयॉर्क शहर के ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग तथा इमारतों के अंदर काम करने वाले अन्य अनेक लोग भी मारे गए थे। दोनों इमरतें दो घंटे के अंदर जमींदोज हो गई थीं। इसके साथ ही आसपास की बल्डिंग्स भी नष्ट हो गई थीं।
50 से ज्यादा देशों के नागरिकों की गई जान
अपहरणकर्ताओं ने तीसरे विमान को बस वाशिंगटन डी.सी. के बाहर, आर्लिंगटन, वर्जीनिया में पेंटागन में टकरा दिया। वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर हुए हमले में मारे गए 3000 पीड़ितों में से न्यूयॉर्क शहर तथा पोर्ट अथॉरिटी के 343 अग्निशामक और 60 पुलिस अधिकारी थे। पेंटागन पर हुए हमले में 184 लोग मारे गए थे। 50 से ज्यादा देशों के नागरिकों ने इस हमले में अपनी जान गंवाई थी।
हमले से थर्रा उठा था अमेरिका
दुनिया पर धाक जमाने वाला अमेरिका इस हमले से पूरी तरह थर्रा गया था। आतंकियों को पकड़ने और हमले का बदला लेने के लिए पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश ने ओसामा और उसके साथियों का खात्मा करने के लिए अरबों डॉलर खर्च डाले पर खाली हाथ ही रहे लेकिन तब नए पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उस मिशन को अंजाम दिया और पाकिस्तान के एबटाबाद में एक गुप्त कार्रवाई करके ओसामा को मौत के घाट उतार दिया।
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