
अमेरिकी सीनेट द्वारा बुधवार को नाटो में स्वीडन और फिनलैंड के लिए सदस्यता की पुष्टि करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए मतदान और बहस की प्रक्रिया पूरी की गई. यह पश्चिम सैन्य गठबंधन के विस्तार में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. मतदान प्रक्रिया के दौरान बुधवार को 95 वोट पक्ष में दिये गए जबकि एक वोट प्रस्ताव के खिलाफ दिया गया. वोटिंग प्रक्रिया को दिखाने के लिए सीनेट के बहुमत के नेता चक शूमर ने दोनों देशों के राजदूतों को चैंबर गैलरी में आमंत्रित किया. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर यूक्रेन के लिए आर्थिक मदद करने में मुख्य भूमिका निभाया, उन्होंने स्वीडन और फिनलैंड को नाटो ग्रुप में जल्द से जल्द शामिल कराने की मांग की है.
बता दें कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने जुलाई में अमेरिकी सीनेट की मंजूरी के लिए प्रोटोकॉल भेजा, जिससे मतदान प्रक्रिया का रास्ता साफ हुआ और इसे सफल होने के लिए सीनेट के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा पास करने की आवश्यकता थी. स्वीडन और फिनलैंड के नाटो ग्रुप में शामिल होने के लिए डाले गए सीनेट वोट की अंतिम संख्या 95 से 1 थी, जिसमें मिसौरी के जीओपी सेन जोश हॉले ने प्रस्ताव के विपक्ष में मतदान किया. सीनेट एमी क्लोबुचारी ने कहा कि इस पूरे मतदान प्रक्रिया के तहत रूस को एक कड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है. यह दुनिया भर के अत्याचारियों के लिए एक चेतावनी है, जो यह मानते हैं कि लोकतंत्र को कब्जे में किया जा सकता है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बिना किसी वजह के रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण ने विश्व सुरक्षा के बारे में हमारे सोचने के तरीके को बदल दिया है.
बता दें कि बाइडन ने स्वीडन और फिनलैंड को नाटो में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया और मई में व्हाइट हाउस में दोनों देशों के सरकारी प्रमुखों से मुलाकात की थी. उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के नए सदस्य बनाने के लिए होने वाली ऐतिहासिक बहस और मतदान का गवाह बनने के लिए सीनेट ने देशों के राजदूतों को आमंत्रित किया था. राष्ट्रपति जो बाइडन ने दो पूर्व गैर सैन्य उत्तरी यूरोपीय साझेदारों को सैन्य गठबंधन में शामिल करने को मंजूरी देने और इसकी द्विदलीय कांग्रेस में पुष्टि की प्रक्रिया को तेज करने का आह्वान किया है.
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