
संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अंतरराष्ट्रीय अदालत ने इजराइल से गाजा में नरसंहार रोकने और ऐसी गतिविधियों को भड़काने वालों को दंडित करने को कहा है। अदालत ने कहा, “इजरायल राज्य नरसंहार सम्मेलन के अनुच्छेद II के दायरे में सभी कृत्यों को रोकने के लिए अपनी शक्ति के भीतर सभी उपाय करेगा।” हालांकि, अदालत ने युद्धविराम का आदेश देने से इनकार कर दिया, जो कि वादी दक्षिण अफ्रीका का प्राथमिक अनुरोध था। गाजा में इजरायल के हमलों में अब तक 26000 से ज्यादा फिलिस्तीनियों के मारे जाने का दावा किया गया है। इजरायल ने 7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद गाजा पट्टी पर जवाबी हमला शुरू किया था।
अदालत ने क्या फैसला दिया – अदालत ने आज कहा कि इजरायल को अपने सैनिकों को फिलिस्तीनियों के खिलाफ नरसंहार करने से रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए। अदालत ने कहा कि वह इजरायल के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका के नरसंहार मामले को खारिज नहीं करेगी। इजरायल ने दक्षिण अफ्रीका के आरोपों को झूठा और “बेहद विकृत” बताया है, और कहा है कि वह नागरिक हताहतों से बचने के लिए हरसंभव प्रयास करता है।
अदालत ने गाजा के हालात पर क्या कहा – अदालत के अध्यक्ष जोन ई. डोनॉग्यू ने कहा, “अदालत इस क्षेत्र में सामने आ रही मानवीय त्रासदी की सीमा से भली-भांति परिचित है और जीवन की निरंतर हानि और मानवीय पीड़ा के बारे में गहराई से चिंतित है।” दक्षिण अफ्रीका ने अदालत से कहा था कि वह इजरायल से “गाजा में और उसके खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को तुरंत निलंबित करने के लिए कहे।” हालांकि, अदालत ने दक्षिण अफ्रीका की याचिका को अस्वीकार कर लिया, लेकिन युद्धविराम को लेकर कोई आदेश नहीं दिया।
इजरायल ने आरोपों को किया है खारिज – शुक्रवार का निर्णय हालांकि केवल अंतरिम है जबकि दक्षिण अफ्रीका द्वारा लाए गए पूरे मामले पर विचार करने में वर्षों लग सकते हैं। इजराइल ने नरसंहार के आरोप को खारिज किया है और अदालत से भी इन आरोपों को खारिज करने का आग्रह किया था। दक्षिण अफ्रीका ने न्यायाधीशों से गाजा में फलस्तीनी लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठाये जाने का आग्रह किया है।
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