
भारत और तालिबान के बीच दोस्ती अब परवान चढ़ने लगी है। भारत ने हाल ही में अफगानिस्तान पर अपने विशेष दूत जेपी सिंह को काबुल भेजा था। भारत ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया जब हाल ही में उसने नई दिल्ली में स्थित अफगान दूतावास पर ‘तालिबानी प्रतिनिधि’ के कब्जे को मान्यता दे दी थी। भारत ने कहा कि इस दौरे पर अफगान जनता को मानवीय मदद और चाबहार पोर्ट के इस्तेमाल पर बातचीत हुई। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार चाहती है कि भारत ईरान में बनाए चाबहार पोर्ट का इस्तेमाल करने में मदद करे। विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान के इस कदम के पीछे पाकिस्तान का कनेक्शन है, वहीं भारत ने भी चीन की चाल को देखते हुए अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी को बढ़ा दिया है। समझते हैं पूरा मामला…
दरअसल, तालिबान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर युद्ध जैसे हालात हैं और अक्सर दोनों के बीच खूनी झड़प हो रही है। इसके अलावा पाकिस्तान की सरकार ने तालिबान को ब्लैकमेल करने के लिए लाखों की तादाद में अफगान शरणार्थियों को देश निकाला दे दिया है। यही नहीं कराची से सामान मंगाने पर कई तरह की पाबंदी लगा दी। अब तालिबान ने इसका तोड़ निकाल लिया है और भारत के बनाए चाबहार पोर्ट में करोड़ों डॉलर के निवेश का ऐलान कर दिया है। चाबहार पोर्ट अब न केवल भारत के लिए मध्य एशिया के दरवाजे खोलेगा बल्कि तालिबान को भी पाकिस्तान पर से अपनी निर्भरता को खत्म करने में मदद करेगा।
भारत को तालिबान ने दिया बड़ा ऑफर – भारतीय दूत के दौरे के बाद तालिबानी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि तालिबानी सरकार ने भारतीय प्रतिनिधि के साथ आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों के विस्तार का प्रण किया है। जबीउल्लाह ने कहा कि भारत जो अफगान जनता को मानवीय मदद दे रहा है, वह बहुत सराहनीय है। हमने भारतीय प्रतिनिधि को उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया। हमने भारतीय प्रतिनिधि को भरोसा दिया कि हम इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और हम एक बार फिर से कूटनीतिक रिश्ते की शुरुआत कर सकते हैं। अफगान विश्लेषकों का कहना है कि अंतरिम अफगान सरकार के साथ भारत का आर्थिक और राजनीतिक रिश्ता बढ़ाना दोनों ही देशों के लिए लाभदायक हो सकता है।
Home / News / अफगानिस्तान में एक तीर से दो शिकार करने की ओर बढ़ा भारत, तालिबान के पास यूं नहीं भेजा ‘दूत’, समझें रणनीति
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