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कभी एक कप चाय खरीदने के नहीं होते थे पैसे, आज करोड़ों का कारोबार, छोटा सा आइडिया कर गया काम


शशि भूषण रांची के रहने वाले हैं। उन्‍होंने हिम्मत और उद्यमशीलता की मिसाल पेश की है। कभी वह एक कप चाय खरीदने से पहले भी 100 बार सोचते थे। आज वह करोड़ों की एक्‍सपोर्ट कंपनी के मालिक हैं। इसका नाम येलॉन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YELON Export Pvt Ltd.) है। इस कंपनी के जरिये शशि ने ग्‍लोबल एक्‍सपोर्ट मार्केट में अपनी खास जगह बनाई है। यह कंपनी मसालों और हाइड्रेटेड (सूखे) सब्जियों के एक्‍सपोर्ट में माहिर है। इसकी नींव बहुत छोटे से आइडिया से पड़ी थी। आइए, यहां शशि भूषण की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
शशि भूषण ने ISM रांची से होटल मैनेजमेंट में ग्रेजुएशन किया है। उनके लिए थाईलैंड की एक कोर्स-विजिट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजारों से शुरुआती परिचय बहुत अहम साबित हुआ। इसके बाद थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों की यात्राओं ने उन्हें बाजार में मौजूद एक कमी को पहचानने में मदद की।
छोटा सा आइडिया कर गया हिट – शशि ने देखा कि मसाले बहुत ऊंची कीमतों पर बेचे जा रहे थे। अक्सर उनमें कोई खास वैल्यू एडिशन नहीं होता था। न ही उन्हें सही तरीकों से खरीदा जाता था। मांग और अवसर दोनों को पहचानकर उन्होंने जरूरी लाइसेंस लेने और निर्यात के कारोबार में उतरने का फैसला किया। यह छोटा सा आइडिया हिट हो गया।
आज शशि भूषण की कंपनी 25 से 30 तरह की हाइड्रेटेड सब्‍ज‍ियों की पेशकश करती है। ये ऐसे प्रोडक्‍ट हैं जिन्हें पकाने के लिए बहुत कम तैयारी की जरूरत होती है। विदेशों की तेज-रफ्तार शहरी जीवनशैली में खास तौर पर इन्‍हें पसंद किया जाता है।
लोगों की जरूरत को किया महसूस – भूषण को लगा कि लोगों के पास हमेशा सब्जियां खरीदने, धोने, काटने और पकाने का समय नहीं होता। हाइड्रेटेड सब्जियों के विकल्प के साथ बस पानी मिलाना होता है और वे तैयार हो जाती हैं।
उनके प्रोडक्‍ट रेंज में अदरक और लहसुन के पाउडर जैसी चीजें भी शामिल हैं। इनसे सिर्फ पांच मिनट में ही खाना तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा इनमें सूखे टमाटर, पत्तागोभी, चुकंदर और गाजर से लेकर कई तरह की चटनियाँ और पिसे हुए मसाले भी हैं। इन्‍हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है।
स्थानीय किसानों से खरीदारी – शशि भूषण ये उत्पाद स्थानीय किसानों से खरीदते हैं। इससे एक ऐसी सप्लाई चेन बनती है जो न केवल ग्रामीण उत्पादकों को सहारा देती है। इसके बजाय विदेशों में बढ़ती मांग को भी पूरा करती है। विदेशों में ऐसे उत्पादों की बहुत मांग है। इन उत्पादों की लोकप्रियता का मुख्य कारण इस्तेमाल में आसानी है।
कभी एक कप चाय खरीदने से पहले सोचते थे – हालांकि, भूषण का यहां तक का सफर आसान नहीं रहा है। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने में काफी संघर्ष करना पड़ा। शशि भूषण को वह समय भी याद है जब एक कप चाय खरीदने से पहले भी उन्हें कई बार सोचना पड़ता था। आज उनकी कंपनी का सालाना कारोबार करोड़ों में है।
रांची के कोकर स्थित अपने दफ्तर से काम करते हुए भूषण ने 15 से 20 परमानेंट स्‍टाफ को रोजगार दिया हुआ है। इनमें से कई लोग सालों से उनके साथ काम कर रहे हैं।