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नौकरी नहीं मिली तो क्‍या? सरकारी लोन से ऐसे खड़ी कर दी कंपनी, अब 30 लाख सालाना का टर्नओवर


अमोल भावसार मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव के रहने वाले हैं। उन्‍होंने साबित करके दिखाया है कि बड़े शहरों के बाहर भी कारोबारी सफलता हासिल की जा सकती है। वह ऐसे इलाके से आते हैं जहां सरकारी नौकरी को ही मंजिल माना जाता है। लेकिन, उन्‍होंने अलग रास्ता चुनकर आने वाले युवाओं के लिए मिसाल पेश की है। अमोल भावसार ने लगभग 30 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर वाला बेवरेज (पेय पदार्थ) का बिजनेस खड़ा कर दिया है। सरकारी नौकरी नहीं मिलने के बाद उन्‍होंने इस दिशा में कदम बढ़ाए थे। आइए, यहां अमोल भावसार की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
नौकरी की चाहत नहीं हुई पूरी – अमोल ने ग्रेजुएशन तो पूरा कर लिया। लेकिन, उन्हें मनचाही नौकरी नहीं मिल पाई। जैसे-जैसे वक्‍त बीता, निराशा बढ़ने लगी। हार मानने के बजाय उन्होंने खुद अपना मौका बनाने का फैसला किया। सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी।
सरकारी लोन बना सहारा – तभी अमोल को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से लागू ‘पीएम माइक्रो फूड एंटरप्राइज अपग्रेडेशन स्‍कीम’ (PMFME) के बारे में पता चला। उन्होंने इसके लिए अप्लाई किया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 25 लाख रुपये का लोन और 7.5 लाख रुपये की सब्सिडी हासिल की।
लोन से रखी लोकल ब्रांड की नींव – इस सरकारी स्‍कीम की मदद से अमोल ने ‘J&B बेवरेज’ शुरू किया। अपना ब्रांड ‘जिंगो सोडा’ लॉन्च किया। स्थानीय मांग को समझते हुए उन्होंने तीन फ्लेवर पेश किए- जीरा, बूम और स्पीड।
शुरुआत में अमोल ने सिर्फ लोकल मार्केट पर फोकस किया। धीरे-धीरे उनका डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क निमाड़ इलाके में फैल गया।
आज ‘जिंगो सोडा’ किराने की दुकानों और छोटे व्यापारियों के पास उपलब्ध है। लोकल ब्रांड होने के कारण इसने जल्द ही स्थानीय ग्राहकों का भरोसा जीत लिया।
क्‍वालिटी कंट्रोल पर खास फोकस -अमोल की फैक्ट्री में सोडा बनाने की पूरी प्रक्रिया मशीनों से होती है। बोतल बनाने और लेबल लगाने से लेकर पैकेजिंग तक इसमें सबकुछ शामिल है। इस व्यवस्थित सिस्टम से क्‍वालिटी एक जैसी बनी रहती है। मार्केट में ब्रांड की विश्वसनीयता मजबूत होती है।
17 परिवारों का सहारा बना यह काम – अमोल का यह काम अब सिर्फ उनकी अपनी कामयाबी नहीं है। यह 17 परिवारों की आजीविका का जरिया भी बन गया है। छोटे शहर में ऐसी यूनिट लगाना एक बड़ी उपलब्धि है। उनका सालाना टर्नओवर अब लगभग 30 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
आगे की योजना के तौर पर वह नए फ्लेवर लाने और ब्रांड को जिले से बाहर भी फैलाने की सोच रहे हैं।
युवाओं के लिए मौका – इस सरकारी योजना के तहत एंटरप्रेन्योर को 35% तक सब्सिडी और ब्याज में छूट मिल सकती है। जिले के किसान और युवा उम्मीदवार मार्गदर्शन के लिए बागवानी और फूड प्रोसेसिंग ड‍िपार्टमेंट से संपर्क कर सकते हैं।
अमोल की कहानी साबित करती है कि सही जानकारी, संस्थागत सहयोग और हिम्मत के साथ एक छोटे से शहर से भी शानदार सफलता हासिल की जा सकती है।