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रात 2 बजे पार्टी में फंसी 17 साल की लड़की ने मां को किया कॉल, फिर जो हुआ वह हर पेरेंट के लिए बड़ी सीख है


टीनएजर्स बच्चे कई बार पीयर प्रेशर में आकर ऐसे फैसले ले लेते हैं, जिनके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। हालांक‍ि, ऐसे समय में पेरेंट्स की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। उनका एक सही कदम बिना डांटे-फटकारे बच्चे की सोच और व्यवहार को सही दिशा दे सकता है। ऐसा ही एक उदाहरण पीडियाट्रिशियन डॉक्टर पवन मंदाविया ने बताया है। उन्‍होंने बताया क‍ि 17 साल की एक बेटी ने रात 2 बजे पार्टी से अपनी मां को कॉल किया और कहा- ‘मम्मी, मुझे घर ले जाओ।’ इसके बाद जो हुआ, वह हर पेरेंट के लिए एक बड़ी सीख बन है। चलिए पूरा मामला जानते हैं।
लड़की ने रात 2 बजे अपनी मां को फोन किया – पीडियाट्रिशियन डॉक्टर पवन मंदाविया का कहना है कि टीनएजर्स गलतियां करेंगे, कभी-कभी पीयर प्रेशर में आएंगे और कभी गलत निर्णय भी लेंगे। इस बात को एक उदाहरण से समझते हैं। दरअसल, एक 17 साल की एक लड़की ने रात 2 बजे अपनी मां को फोन किया। वह उस समय ऐसी पार्टी में थी, जहां उसे नहीं होना चाहिए था। उसके आसपास ऐसे लोग थे जिन्हें उसकी मां भी नहीं जानती थी।
‘मम्मी प्लीज मुझे लेने आ जाओ – इसलिए शायद वह डर गई थी, असहज महसूस कर रही थी और सिर्फ अपने घर जाना चाहती थी। इसी वजह से उसने फोन उठाया और अपनी मां को कॉल किया। उसने सिर्फ इतना कहा, ‘मम्मी प्लीज मुझे लेने आ जाओ।’ दूसरी तरफ से मां ने जवाब दिया, ‘डोंट वरी, मैं बस आ रही हूं।’ मां तुरंत घर से निकल गई और कुछ समय बाद उस पार्टी में पहुंच गई। मां ने बेटी को वहां से बाहर निकलकर गाड़ी में बैठने को कहा और फिर दोनों साथ घर लौट आए।
बेटी ने सोचा डांटेंगी मां, मगर म‍िला स‍िर्फ प्‍यार – बेटी के मन में यह डर था कि अब उससे सवाल-जवाब किए जाएंगे, जो कोई भी मां इस स्थिति में पूछती- जैसे तुम कहां थीं, तुमने झूठ क्यों बोला, और वो लोग कौन थे। वह इन सभी सवालों के लिए मन ही मन तैयार थी। लेकिन मां ने कुछ भी नहीं पूछा। दोनों चुपचाप और शांति से घर लौट आए। घर पहुंचने के बाद मां ने बस इतना कहा- ‘पानी पी लो और आराम से सो जाओ।’ न कोई सजा, न डांट-फटकार, सिर्फ प्यार और सामान्य व्यवहार।
अगले दिन भी मां बिल्कुल नॉर्मल रही। बेटी को समझ ही नहीं आया कि उसकी मां ने उस रात कुछ कहा क्यों नहीं। कई सालों बाद, जब वह खुद मां बनी, तब उसे यह एहसास हुआ कि उसकी मां ने उस रात आखिर किया क्या था। दरअसल, उसकी मां को इस बात की खुशी थी कि मुश्किल वक्त में उसकी बेटी ने उसे याद किया। उसके लिए यह अपने आप में बहुत बड़ी बात थी। एक्‍सपर्ट अंत में कहते हैं क‍ि बतौर पीडियाट्रिशियन, मैं कहना चाहता हूं कि पेरेंटिंग का असली मतलब यही है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें।