
नेपाल में प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के गठबंधन सहयोगी केपी शर्मा ओली और विपक्षी नेपाली कांग्रेस नेता शेर बहादुर देउबा के बीच मुलाकात ने अटकलों को बढ़ा दिया है। कुछ सप्ताह पहले ही ओली ने नेपाल के वार्षिक बजट को लेकर प्रचंड सरकार की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी।
नेपाल में प्रधानमंत्री पुष्प कमल दल प्रचंड और उनकी पार्टी की सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। शनिवार को नेपाली कांग्रेस और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी (CMN-UML) के नेताओं के बीच बंद कमरे में हुई बैठक के बाद ये आशंका तेज हो गई है। माना जा रहा है कि संसद की दो सबसे बड़ी पार्टियां प्रचंड को सत्ता से हटाकर बारी-बारी से सरकार का नेतृत्व अपने हाथ में लेने की तैयारी कर रही हैं। चार महीने पहले ही केपी शर्मा ओली की सीपीएन-यूएमएल सत्ताधारी गठबंधन में शामिल हुई थी। प्रचंड ने इसी साल मार्च की शुरुआत में पाला बदलते हुए शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस से गठबंधन तोड़कर ओली से हाथ मिला लिया था।
ओली ने की है सरकार की सार्वजनिक आलोचना – देउबा और ओली के बीच बैठक यूएमएल प्रमुख ओली के सरकार द्वारा पेश वार्षिक बजट की सार्वजनिक आलोचना के कुछ सप्ताह बाद हुई है। उन्होंने इसे ‘माओवादी बजट’ कहा था। ओली से मुलाकात के दौरान देउबा के साथ उनकी सांसद पत्नी आरजू राणा भी मौजूद रहीं। इस बैठक के दौरान क्या बात हुई, इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि, ओली ने कहा है कि देश को मौजूदा हालात में नहीं चलाया जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस ने नेपाली कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया है कि दोनों नेताओं ने निष्क्रिय संघवाद और चुनाव प्रणाली की समीक्षा करने और आवश्यक बदलावों के बारे में व्यापक समझ बनाने पर सहमति जताई है।
साथ में आने पर सहमत – नेता ने यह भी बताया कि दोनों पक्ष मौजूदा सदन के बाकी बचे 32 महीने के लिए गठबंधन का नेतृत्व करने पर सहमत हुए हैं, लेकिन पहले आधे समय में कौन नेतृत्व करेगा, इस पर बातचीत चल रही है। इस बीच प्रधानमंत्री प्रचंड ने रविवार को ओली के साथ एक बैठक की। इसमें उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्ट के प्रमुख रबी लाबिछाने भी शामिल हुए। उनके बारे में भी अटकले हैं कि वे सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर निकलने पर विचार कर रहे हैं।
नेपाली कांग्रेस ने क्या कहा? – नेपाल से प्रकाशित होने वाले काठमांडू पोस्ट ने नेपाली कांग्रेस के प्रचार विभाग के प्रमुख मीन बहादुर बिश्वकर्मा के हवाले से बताया कि दोनों पूर्व प्रधानमंत्रियों ने राष्ट्रीय राजनीति, दशकों से पुरानी अधूरी संक्रमणकालीन न्याय प्रक्रिया और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को हल करने के लिए संभावित सहयोग जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा की। बिश्वकर्मा ने पोस्ट से कहा, ‘बैठक सकारात्मक थी लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि दोनों दल साथ में नई सरकार बनाने के लिए सहमत हो गए हैं। हालांकि, सकारात्मक चर्चा जारी रहती है तो ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।’
यूएमएल ने सरकार को बताया स्थिर – वहीं, ओली के नेतृत्त वाले यूएमएल के प्रचार विभाग के प्रमुख राजेंद्र गौतम ने मौजूदा गठबंधन में किसी भी बदलाव की संभावना को खारिज किया है। गौतम ने कहा, ‘दहल के नेतृत्व वाली सरकार स्थिर बनी हुई है और यूएमएल उसका समर्थन करना जारी रखेगी। यूएमएल अध्यक्ष ओली और कांग्रेस प्रमुख देउबा के बीच बैठक का उद्येश्य प्रधानमंत्री दहल को सत्ता से हटाना नहीं था।’ वहीं, बजट की आलोचना को लेकर गौतम ने कहा कि इसका यह मतलब नहीं है वे गठबंधन को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष ने बजट की आलोचना की, क्योंकि कई सांसदों को बजट को लेकर शिकायतें हैं।
IndianZ Xpress NZ's first and only Hindi news website