
भारत के पहलगाम में बर्बर आतंकी हमला करने वाले द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को आतंकवादी संगठन घोषित करके अमेरिका ने पाकिस्तान को बहुत बड़ा झटका दिया है। द रेजिस्टेंस फ्रंट वही आतंकी संगठन है, जिसने पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। खास बात ये है कि जब पूरी दुनिया पहलगाम के हमलावरों की निंदा कर रही थी, उस समय पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार टीआरएफ का खुलकर समर्थन कर रहे थे। इशाक डार ने पाकिस्तान की संसद में बताया था कि उन्होंने किस तरह संयुक्त राष्ट्र के बयान से टीआरएफ का नाम निकलवाया।
TRF का पाकिस्तान ने किया बचाव – इशाक डार ने अप्रैल के आखिर में पाकिस्तान की संसद में बताया था कि पाकिस्तान ने टीआरएफ का नाम संयुक्त राष्ट्र के बयान में डाले जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उसे नहीं रखा गया। डार ने कहा था कि अमेरिका ने हमले की निंदा के लिए एक प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर पाकिस्तान को दो आपत्तियां थीं। पहली आपत्ति थी कि उस पर केवल पहलगाम लिखा था और जम्मू-कश्मीर का जिक्र नहीं थी। दूसरी आपत्ति द रेजिस्टेंस फ्रंट को जिम्मेदार ठहराए जाने को लेकर थी। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में इसे द रेजिस्टेंस फोरम कहकर संबोधित किया।
संयुक्त राष्ट्र में टीआरएफ के लिए अड़ गया पाकिस्तान – इशाक डार ने कहा कि हमने साफ कहा कि हमें सबूत दिखाइए कि ये टीआरएफ ने किया है। उन्होंने टीआरएफ के जिम्मेदारी लेने वाले बयान को झूठा बताया और कहा कि पाकिस्तान ने ढाई दिन तक बयान को रोके रखा क्योंकि इसे आम सहमति से ही जारी किया जा सकता था। डार ने कहा, ‘हमने इसे खारिज कर दिया। मुझे बड़ी-बड़ी राजधानियों से फोन आए। कहा गया कि पाकिस्तान पर ब्लेम आएगा कि प्रेस रिलीज नहीं आई। इतना बड़ा वाकया हो गया। हमने कहा कि कुछ नहीं, पाकिस्तान इसे नहीं स्वीकार करेगा।’
पाकिस्तान ने ढाई दिन तक रोके रखी रिलीज – इशाक डार ने आगे बताया कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने बताया कि पाकिस्तान प्रेस रिलीज के लिए तैयार है लेकिन जम्मू-कश्मीर जोड़ना होगा और टीआरएफ का नाम हटाना होगा और ये दोनों बदलाव होने के बाद ही प्रेस रिलीज को जारी किया गया। पाकिस्तान जिस टीआरएफ के लिए अमेरिका के प्रस्ताव के विरोध में चला गया था, अब उसी अमेरिका ने पाकिस्तान के पाले इस समूह को विदेशी आतंकवादी समूह (FTO) और विशेष रूप से नामित आतंकवादी (SDGT) के रूप में नामित किया है।
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