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200 से ज्यादा फाइटर जेट की तुरंत जरूरत!..मिग-21 के बाद IAF का फ्यूचर प्लान? चीन-पाकिस्तान के मुकाबले हम कहां हैं


भारतीय वायुसेना ने अपने 6 दशकों से भी पुराने साथी मिग-21 को विदा कर दिया है। ऐसे में चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों से निपटने के लिए इसे तत्काल लड़ाकू विमानों की बहुत ज्यादा आवश्यकता है। भारत स्वदेशी से लेकर विदेशी विमानों के कई सारे प्रोजेक्ट पर काम करना है, जब ये पूरे हो जाएंगे तभी निश्चिंत बैठा जा सकता है।
भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार (26 सितंबर, 2025)को अपने 62 साल पुराने फाइटर जेट मिग-21 (MiG-21) को शानदार विदाई दे दी। चंडीगढ़ में एक भावना से भरे कार्यक्रम में वायुसेना ने मिग-21 के आखिरी दोनों स्क्वाड्रन (नंबर-23) पैंथर्स और कोबरा (नंबर-3) को अलविदा कहा। इसके साथ पहले से ही फाइटर जेट की कमी झेल रही वायुसेना के पास से 36 फाइटर जेट और चले गए। आज तथ्य यह है कि चीन और पाकिस्तान दोनों को दुश्मन के तौर पर देखते हुए भारतीय वायुसेना के लिए 42 फाइटर स्क्वाड्रन की मंजूरी मिली हुई है। लेकिन, दो और स्क्वाड्रन घटने से अब यह संख्या घटकर मात्र 29 स्क्वाड्रन पर सिमट गई है। अगर एक स्क्वाड्रन में 16 से 18 फाइटर जेट का भी अनुमान लगाएं तो भारत को उत्तरी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर लड़ने के लिए कम पड़ रहे 13 स्क्वाड्रनों के लिए 200 से ज्यादा फाइटर जेट की तत्काल आवश्यकता है।
वायुसेना के पास बचे 29 फाइटर स्क्वाड्रन – यह भी तथ्य है कि भारतीय वायुसेना के लिए जो 42 स्क्वाड्रन सैंक्शन है, उसे इतने कभी मिल नहीं पाए हैं। यह मंजूरी इस हिसाब से मिली हुई है कि भारत चीन और पाकिस्तान के खतरों से एकसाथ मुकाबला करने के लिए तैयार रहे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र सेना ने देखा है कि किस तरह से चीन, पाकिस्तान को भरपूर सहयोग दे रहा था। पाकिस्तान के पास 80 प्रतिशत से ज्यादा हथियार तो चाइनीज हैं ही, वह तब उसकी मॉडर्न वॉरफेयर में भी सक्रिय सहयोग कर रहा था। ऐसे में यह जानना और समझना जरूरी है कि भारत के पास अपनी वायुसेना के लिए फ्यूचर प्लान क्या है? क्योंकि, हम अपनी आवश्यकता से 70 प्रतिशत से भी पीछे हैं।