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कुलभूषण जाधव मामले में ईरान की भूमिका पर क्यों उठे सवाल? पाकिस्तान की जेल में मौत की सजा काट रहे भारतीय आर्मीमैन


दुनिया जंग के कठिन दौर से गुजर रही है। जहां एक तरफ इजरायल और ईरान एक दूसरे पर मिसाइलें बरसा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच भी भीषण लड़ाई जारी है। इस बीच कुलभूषण जाधव को आज पाकिस्तान की कैद में 10 साल पूरे हो गए हैं। वहीं, कुलभूषण जाधव जिन्हें पाकिस्तान ने ईरान से 3 मार्च 2016 को किडनैप कर लिया था। पिछले 10 साल से कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की जेल में रहकर यातनाएं झेल रहे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर कुलभूषण जाधव थे कौन और वह ईरान और फिर ईरान से पाकिस्तान की जेल में कैसे पहुंच गए।
कुलभूषण जाधव महाराष्ट्र के सांगली में साल 1970 में पैदा हुए। 1987 यानी सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी जॉइन कर ली और 1991 में नौसेना में शामिल हो गए। उन्होंने भारतीय नौसेना से रिटायर होने के बाद ईरान में अपना करोबार शुरू किया। कारोबार के सिलसिले में वे अक्सर ईरान जाते रहते थे। ऐसे ही अपने कारोबार के सिलसिले में वह काम के लिए मार्च 2016 में ईरान गए, जहां से पाकिस्तान समर्थित सुन्नी आतंकी संगठन ने उन्हें किडनैप कर लिया और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को सौंप दिया।
ईरान ने कभी नहीं की रिहाई की मांग – कुलभूषण जाधव की किडनैपिंग में ईरान की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। ऐसा इसलिए क्योंकि जाधव को ईरान की धरती से किडनैप कर पाकिस्तान ले जाया गया और इस बात की किसी को भनक तक नहीं लगी। किसी देश की सरकार या वहां के अधिकारियों की मर्जी के बिना ये काम कर पाना बेहद मुश्किल लगता है। कुलभूषण लंबे सय से ईरान में कारोबार कर रहे थे, लेकिन इसके बाद भी ईरान ने कुलभूषण की रिहाई की मांग पाकिस्तान से कभी नहीं की। ईरान ने कुलभूषण की किडनैपिंग को लेकर भी कभी कोई बयान नहीं दिया। ऐसे में ईरान इस केस को लेकर ईरान की भूमिका भी संदेह के दायरे में है।