
क्या AI आपकी नौकरी निगल जाएगा? लगातार एडवांस होते AI की वजह से लोगों में यह डर गहराता जा रहा है और इसके परिणाम हमें दुनिया भर में दिखने भी लगे हैं। ऐसे में चीन की हांगझू शहर की एक अदालत ने मिसाल कायम करने वाला फैसला दिया है। चीनी कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी को काम से निकालने का आधार AI नहीं हो सकता, क्योंकि यह कोई मजबूरी या आपदा नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत समेत अमेरिका और यूरोप को भी इस तरह के कानूनों के बारे में सोचना चाहिए।
क्या AI आपकी नौकरी निगल जाएगा? लगातार एडवांस होते AI की वजह से लोगों में यह डर गहराता जा रहा है और इसके परिणाम हमें दुनिया भर में दिखने भी लगे हैं। ऐसे में चीन की हांगझू शहर की एक अदालत ने मिसाल कायम करने वाला फैसला दिया है। चीनी कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी को काम से निकालने का आधार AI नहीं हो सकता, क्योंकि यह कोई मजबूरी या आपदा नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत समेत अमेरिका और यूरोप को भी इस तरह के कानूनों के बारे में सोचना चाहिए।
AI जब से अस्तित्व में आया है, तब से यह डर लगातार बढ़ता जा रहा है कि AI लोगों की नौकरी खा जाएगा। AI के हर नए मॉडल और वर्जन के साथ यह डर और भी ज्यादा गंभीर होता जाता है। हालांकि चीन ने इस डर पर लाल लकीर खींची है। दरअसल चीन के हांगझू शहर की एक अदालत ने इस पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। चीन में एक कंपनी ने अपने कर्मचारी को यह कहकर कम सैलरी वाला दूसरा काम दे दिया था कि AI उसका मुख्य काम संभाव रहा है।
जब मामला कोर्ट में गया, तो कोर्ट ने कंपनी के तर्क को खारिज कर दिया। चीनी कोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है, जो AI के दौर में भी कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रखता है। कोर्ट का मत है कि AI को अपनाना कंपनी का निजी फैसला है और न कि ऐसी कोई आपदा जिससे किसी को काम से निकाला जाए। चीनी कोर्ट ने साफ किया है कि AI ऑटोमेशन का मतलब यह नहीं हो सकता कि इंसान की जरूरत पूरी तरह खत्म हो गई है।
चीनी कोर्ट ने खींची लक्ष्मण रेखा – रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन में सामने आया मामला क्वालिटी एश्योरेंस सुपरवाइजर का है। इस शख्स की सैलरी 25,000 युआन थी। कंपनी ने AI अपग्रेड का हवाला देकर शख्स को कम सैलरी वाला काम ऑफर किया था। कर्मचारी के मना करने पर उसे काम से निकाल दिया गया। इस पर वह शख्स कंपनी को कोर्ट ले गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार कोर्ट ने माना कि AI कंपनी की मजबूरी नहीं है, जिसके चलते नौकरी खत्म करना जरूरी हो। कोर्ट के अनुसार इसे कंपनी के शटडाउन या विलय की तरह नहीं देखा जा सकता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सिर्फ AI का बहाना देकर किसी की नौकरी नहीं छीनी जा सकती।
नहीं चलेगा AI का बहाना? – अभी तक यह आम मत था कि किसी कंपनी को अगर लगता है कि AI की मदद से काम बेहतर तरीके से हो सकता है, तो वे इंसानों को काम से निकाल सकती है या उनकी सैलरी कम कर सकती है। हालांकि, हांगझू की अदालत ने इस सोच को चुनौती दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि अगर कंपनी किसी को दूसरी भूमिका में भेजती है, तो इसकी जायज वजह होनी चाहिए। इसके अलावा कोर्ट ने सैलरी में 40% की भारी कटौती और पद का दर्जा गिराना भी उचित नहीं माना है। इस फैसले के बाद कंपनियों को साबित करना होगा कि जिस पद से लोगों को हटाया जाएगा, उसे बनाए रखने की कोई वजह नहीं थी। चीनी कोर्ट का यह फैसला AI के उस डर को खत्म करता है, जिसे लोग अपनी नौकरी के लिए खतरा मान रहे थे।(REF.)
क्या भारत समेत दूसरे देशों को करना चाहिए विचार? – एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस फैसले को सिर्फ चीन तक सीमित करने नहीं देखना चाहिए। भारत समेत, अमेरिका और यूरोप में भी AI की वजह से नौकरियों पर बहस चल रही है। बावजूद इसके इसे लेकर कोई कानून नहीं बना है। एक्सपर्ट्स का दावा है कि चीनी अदालत का फैसला एक ‘टेंप्लेट’ की तरह काम कर सकता है, जो दुनिया भर के नीति-निर्माताओं को बताता है कि तकनीक के बदलाव को नियंत्रित करना जरूरी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार AI आने वाले समय में कई फील्ड की नौकरियों के लिए खतरा बनेगा। ऐसे में विकसित होती तकनीक लोगों के काम के लिए खतरा नहीं बननी चाहिए। भारत में भी AI को हाथों हाथ लिया जा रहा है लेकिन तकनीकी प्रगति और मानवीय अधिकारों के बीच संतुलन बिठाना लोगों की भलाई के लिए जरूरी होता जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया को अब ऐसी नीतियों की जरूरत है जहां AI के फायदे सबको मिलें, लेकिन इसका सारा बोझ सिर्फ कर्मचारी न उठाएं।
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